उज्जैन के प्रसिद्द ज्योतिष पं.अंकित दुबे ने बताया मकर संक्रांति के पावन पर्व का महत्व एवं पूजन विधि के साथ कुछ अचूक उपाय

मेघा तिवारी की रिपोर्ट

उज्जैन(मध्य प्रदेश) l जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर यानी प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है l वहीं मल माह भी पूर्ण हो जाता हैं l शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। एक अन्य कथा के अनुसार, असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति का पर्व मनया जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था, तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा। संक्रांति पर विशेष जो दान होता हैं वह तिल, गुड का होता हैं एवं शिप्रा अथवा गंगा नदी में स्नान करने से समस्त मोक्ष की प्राप्ति भी होती हैं l साथ ही संक्रांति पर्व के पश्चात विवाह के मुहूर्त जो एक माह तक नही रहते वो भी पुनः प्रारम्भ हो जाते हैं । पंडित जी ने बताया कि इस मकर संक्रांति पर करे ये कुछ विशेष उपाय- क्योंकि ग्रहों के अधिष्ठ सूर्य देव कर रहे हे अपने पुत्र शनि की राशि अर्थात मकर राशि में प्रवेश तो आप संक्रांत के दिन संध्या काल में जरूर करे यह काम उससे शनि देव प्रसन्न होगे आने वाले कुछ समय पर जो राशियों पर साढ़े साती लगने वाली हे या चल रही हे वह पीपल के पेड़ में सरसो के तेल का दीपक लगाए और उसमें काली तिल अवश्य डाले और शनि महाराज से अपनी मन की मनोकामना कहे एवं हनुमान मंदिर में जाकर चौमुखी दीपक लगाए और उसमें 2 लौंग डाले।

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