तुम्हारे आगोश में जो चांद का टुकड़ा है। तुम रूह तक रोशनी से भीगना रात को।।(मेरी डायरी के पन्नों से)

तुम्हारे आगोश में जो चांद का टुकड़ा है। तुम रूह तक रोशनी से भीगना रात को।।(मेरी डायरी के पन्नों से)
चर-अचर इस सृष्टि में ..प्रेम ही धारण करने सबसे श्रेष्ठ तत्व है..धर्म है
शाश्वत प्रेम के समर्थन में…
प्रेम का महा उत्सव ..हर रोज हर पल जारी है…
जब आप प्रेममय होंगे..तो नफरत फैलाने वाले तिलचट्टों की मौत भी तय है..
धार…एक अभियान..,विसंगतियों के खिलाफ शंखनाद/नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,लेखक
प्रेम का महा उत्सव तो जारी है..अनवरत..लगातार.कोई कुछ भी कर ले हर पल ..शायद तुम इसे देख नहीं पाते.. यह तो शाश्वत है..भला हम कौन होते हैं जो प्रेम के लिए एक दिन चुनें…सुनो प्रेम ही चुनता है हमें अपने लिए..हमारे बस में नही की हम इसे चुनें क्योंकि हमारा क्या है…जो भी सुंदर दिखे उसे पाना चाहते हैं पर ऐसे में तो गड़बड़ हो जायेगा प्रेम यह समझता है… इसलिए यही चुनता है हमें और जब प्रेम हमें चुनता है तो जीवन उत्सव में तब्दील हो जाता है..आनन्द की शहनाइयाँ.. बज उठती है..बिना बूंदों की ऐसी बरसात होती है कि बदन भले ना भीगे..गीला ना हो पर आत्मा पवित्र हो जाए.. रूह पाक हो जाए.. ऐसा आमंत्रण आपके लिए भी हो सकता है बस सारे अहंकार का विसर्जन कर ह्र्दय का द्वार खुला रखें ..फिर सम्भव है कि प्रेम आपको चुन ले..जब बिना किसी से पाने की इच्छा..खुशियां बांटने का मन करे…लगे कि अब कुछ पाने की ख्वाईश नहीं तो समझ लेना प्रेम तुम्हें चुन रहा..यह जश्न बेला है अमृत वर्षा यह अद्भुत सौंदर्य से भरा संसार तुम्हें स्वीकार कर रहा..इसलिए की तुम बांटने योग्य हुए.जाओ..ह्र्दय..ह्र्दय भाप की तरह उड़ रहे संवेदनाओं को सहेजो..आत्मीयता का मिठास भरा रस घोल दो हवाओं में..ताकि प्रेम के खिलाफ षड़यंत्र करने के साथ..नफरत फैलाने वाले तिलचट्टों पर कहर टूट पड़े(जारी..)



