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महाराष्ट्र मे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी;संजय राउत ने बताया षडयंत्र

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने शिवसेना विधायकों की अयोग्यता मामले में फैसला सुनाया। नार्वेकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना। साथ ही 16 विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। इसके बाद से ही सियासी जगत में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कोई इस फैसले से खुश दिखा तो किसी ने इससे नाखुशी जाहिर की।

पहले जानते फैसले के खिलाफ किसने क्या कहा…

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हम लोगों के बीच जाएंगे। हम लोगों के बीच जाते रहे हैं और हम राज्य के लोगों के साथ मिलकर लड़ेंगे। आज जो स्पीकर का आदेश आया है वह लोकतंत्र की हत्या है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी अपमान है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि राज्यपाल ने अपने पद का दुरुपयोग किया है और गलत फैसला लिया है…हम ये लड़ाई आगे लड़ेंगे और हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है।

आदित्य ठाकरे ने ट्वीट किया कि आज के फैसले ने आधिकारिक तौर पर हमारे राज्य में लोकतंत्र और संविधान के सिद्धांतों और स्तंभों की हत्या कर दी है। यह फैसला केवल शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे के बारे में नहीं था। यह है हमारे देश के संविधान और लोकतंत्र के बारे में। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि इस घृणित राजनीतिक खेल के खिलाफ संविधान और लोकतंत्र की सुरक्षा होगी

 

शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि आज का फैसला कोई न्याय नहीं है, ये एक षड्यंत्र है, हम सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे। हमारी लड़ाई न्यायालय में जारी रहेगी।

उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मुझे बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं है। हमने सुना था ‘वही होता है जे मंजूर-ए-खुदा’ होता है’… 2014 के बाद एक नई परंपरा शुरू हुई है, ‘वही होता है’ जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है। यही हम महाराष्ट्र में होते हुए देख रहे हैं… यह नैतिकता का एक दुर्भाग्यपूर्ण समझौता है। कुछ ऐसा किया जा रहा है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया था ‘कानूनी’ हो गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

उद्धव को मिला एनसीपी-कांग्रेस का साथ

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि इस फैसले के बाद अब उद्धव को सुप्रीम कोर्ट जाना होगा। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्याय मिलने की उम्मीद है। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का फैसला असंवैधानिक है और यह एक अलोकतांत्रिक फैसला है और यह पार्टी के नियमों के खिलाफ है, उन्होंने स्वीकार किया कि असली शिवसेना 1999 थी, उन्होंने दोनों पक्षों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। इस फैसले के बाद लोकतंत्र खतरे में है और बीजेपी को इस फैसले से दिक्कत होगी।

सुप्रीम कोर्ट जाएगी उद्धव गुट

मामले में अंबादास दानवे ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और इस फैसले को चुनौती देंगे। महाराष्ट्र विधान परिषद में एलओपी और शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि यह फैसला गलत है। अगर उन्हें यह फैसला देना ही था तो उन्होंने इतना समय क्यों लिया? यह शुरू से ही टाइम पास था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दें।

 

अब जानिए फैसले पर किसने जताई खुशी…

मामले में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने जो फैसला दिया है ये फैसला नियम और कानून के मुताबिक है। 2/3 बहुमत के माध्यम से एकनाथ शिंदे के पास 37 MLA हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने भी शिंदे की शिवसेना को असली गुट माना। उद्धव ठाकरे को बहुत झटका लगा है।

महाराष्ट्र के मंत्री और शिव सेना (शिंदे गुट) नेता दीपक केसरकर ने कहा कि इस फैसले से लोकतंत्र मजबूत होगा। फैसले की सच्चाई यह है कि पार्टी में भी लोकतंत्र होना चाहिए। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। यह निर्णय सभी तथ्यों के विश्लेषण के बाद लिया गया। यह एक सही निर्णय है।

 

शिवसेना (शिंदे गुट) के मुख्य सचेतक भरत गोगावले ने कहा कि हमारे सीएम कहते हैं कि हम उन्हें (विपक्ष को) अपने काम से जवाब देंगे। मंत्री उदय सामंत ने कहा कि यह तय हो गया है कि गद्दार कौन है। हम फैसले से संतुष्ट हैं और विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हैं।

राहुल नार्वेकर के फैसले की बड़ी बातें भी जान लीजिए

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिवसेना के दो गुटों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए संविधान पर कोई सहमति नहीं है। दोनों दलों के नेतृत्व संरचना पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। मुझे विवाद से पहले मौजूद नेतृत्व संरचना को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक संविधान तय करना होगा।

उन्होंने कहा कि शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार, मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है।

उन्होंने कहा कि 21 जून 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी गुट बना तब शिंदे गुट ही असली शिवसेना राजनीतिक दल था।

राहुल नार्वेकर ने कहा कि विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं। शिवसेना के किसी भी गुट का कोई भी विधायक अयोग्य नहीं।

फैसले के बाद नार्वेकर ने क्या कहा?

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि जो लोग ऐसे समझते हैं कि इसमें किसी प्रकार की अनियमतता हुई है, तो क्या अनियमतता हुई है, पहले वो बताएं? केवल आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन आरोपों को सिद्ध करना मुश्किल है। खासकर की तब जब निर्णय कानून के आधार पर लिया हुआ होता है। प्रत्येक नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार है, लेकिन कोर्ट जाने के बाद आपको यह सिद्ध करना पड़ेगा कि हमारे द्वारा दिया गया निर्णय अवैध है।

 

 

 

 

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