नियमितीकरण :निकलेगी फांस तो बढेगी आस..
कुल होमवर्क के आधार पर तकनीकी फार्मूले के साथ फैसले लिए जा सकते है

जगदलपुर /नवीन श्रीवास्तव।नियमितीकरण का मामला अब जनता के सेहद और व्यवस्था तंत्र से जुड़ चुका है।खासकर स्वास्थ और पंचायत जैसे आम जनता से सीधे जुड़े विभागों के माध्यम से जिन विभागों में सबसे अधिक संविदा अस्थायी,अनियमित कर्मचारी हैं हड़ताल के बाद यहां की स्थिति अत्यंत गंभीर है स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग ठप है उसे किसी तरह ऑक्सीजन देकर हरकत में रखने की कोशिश जरूर हो रही है पर कब तक? सवाल यह है कि सरकार के लिए गले की फांस बन चुकी नियमितीकरण के विषय को लेकर कितना काम अभी तक गंभीरता से हुआ है क्योंकि इन्हीं तैयारियों पर किसी तरह का फैसला सामने आ सकता है अनियमित कर्मचारी यहां तक कहने लगे हैं कि मांगे पूरी नहीं तो हमारा पूरा परिवार दूसरी पार्टी को वोट देंगे! मामला सियासत और सत्ता से भी जुड़ चुका उपमुख्यमंत्री श्री टीएस सिंहदेव का जो बयान खबरों में है जिसमें उन्होंने कहा है कि कैबिनेट की जो बैठक है वह संविदा हित में महत्वपूर्ण है उनके इस बयान के बाद से हड़ताली कर्मचारियों के उत्सुकता और धड़कनें बढ़ गई है।
बहरहाल यह सही है कि जनता की सेहत और सत्ता से लेकर अस्थाई संविदा एवं अन्य इसी तरह के प्रशासकीय रूप से परिभाषित कर्मचारियों के जीवन की बुनियादी जरूरतों से यह मामला जुड़ा है उसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं किया जा सकता संभव है पूर्ण। फैसले की रास्ते पूर्व तैयारियों के साथ तकनीकी मामले पर काम का होना रास्ते में आ सकता है पर जानकारों की माने तो सरकार इस विषय में अपनी उपस्थिति को गंभीरता से ले रही है अब बचे दिनों के साथ इस विषय मे कुल होमवर्क के आधार पर किसी तरह की तकनीकी फार्मूले के साथ राहत का पिटारा भी खोल सकती है उम्मीद किया जाए किया दिन रात काम करने वाले संविदा , अस्थाई अनियमित एवं दैनिक वेतन भोगी एवं इसी तरह के अन्य कर्मचारियों के लिए सुखद हो।



