गुरु ही है…जो बताते हैं कि वह बटन कौन सा जिसे दबाने से हमारे अंदर ..तामसिकता डिलीट हो सकता है

गुरु पूर्णिमा विशेष/धार…एक अभियान (विसंगतियों के खिलाफ एक शंखनाद,17 वर्षों से अधिक समय से लगातार जारी /नवीन श्रीवास्तव,लेखक ,पत्रकार,बस्तर,जगदलपुर
आप सिर उठाकर गर्व कर सकते है यह अभियान नहीं स्वाभिमान और जागरण का विषय है कि यह देश ही है *यह भारत ही है…पूरी धरती पटल, पूरी दुनियां में एक मात्र देश .. जहां धरती को लाल कर देने के साथ किसी को कमतर साबित करने,किसी महत्वाकांक्षा को जीने ..कभी क्रांति नहीं हुई बल्कि बदलाव के लिए आध्यात्मिक एवं अत्यंत वैज्ञानिक प्रयोग किये गए हैं* मात्र यही नहीं नहीं बल्कि उसे जीवन शैली में शामिल किया गया…इसीलिए हमारे यहां क्रांति से ज्यादा संक्राति का महत्व है सत्व स्वरूप उर्जा को ऊर्ध्व रूप देने का पर्व..बहरहाल सनातन और असीम उर्जा की महिमा लिए देश फिर कभी लिखने का प्रयास करूंगा …आज गुरु पूर्णिमा है ज्ञान की महिमा को आत्मसात करने का दिन इसके साथ ही व्यवहारिक रूप से गुरु के साथ शिक्षा पर मनन भी वर्तमान में प्रासंगिक है–
दरअसल पांच तत्वों के साथ छठा तत्व सत्व स्वरूप शिक्षा भी प्रेरक तत्व है … देने का भाव …और गुरु तो *सृजनकर्ता हैं गुरु वे हैं ..जिससे सत्व का बोध चेतन स्वरुप शरीर धारण कर लें ताकि पूरी धरती पर सारे जीवों के लिए कल्याणकारी सुवासित फूलों की फसलें लहलहा उठे*।..मानवता, सहज विकास और राष्ट्र विरोधी धनलोलुप ऐसे भेड़ियों की कमी नहीं है जिन्होंने शिक्षा को बाजारू बनाया है …क्योंकि उन्हें डर लगता है, उन्हें भय है कि शिक्षा का अलख जगा ..तो कथित विकास, साक्षरता ,सुख के आड़ में फलफूल रहा दुकानदारी बंद हो जाएगा ..गुरुता का भाव पूर्ण स्वरूप में जागृति हो गया तो शिक्षा जैसे सहज भाव को बाजारू बनाने वाले भी जलभुन कर नष्ट हो जाएंगे…वर्तमान में एक तरफ अच्छे,सच्चे लोग भी हैं जो शिक्षा को सार्थक अर्थ देने लगातार लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था पूंजीपतियों के तेज दांत वाले जबड़े में भी है ..बड़ी बड़ी चमचमाती इमारतों वाले ऐसे स्कूलों के कथित आयोजित भव्य परन्तु दिखावे के समारोह में गले में माला पहनने की राजनीतिक भूख और शौक से भी शिक्षा व्यवस्था को बचाना जरूरी है साथ ही केवल धन,वैभव ,महत्वाकांशा के अंधेरे फैलाने वाले .. *आत्मा से भूखे,दरिद्र,अधम.. ऎसे सफेदपोश लोगों को धरती से, देश की जमीन से डिलीट करना जरूरी है*… ऐसे में किसी ने कितना सही कहा है कि –गुरु ही है , ..जो यह बताता है कि वह बटन कौन सा जिसे दबाने से हमारे अंदर से तामसिकता डिलीट हो सकता है ..और अंदर से फूटते उजालों से सभी तरह के अन्धेरे का विनाश हो जाए…।।(लेख सन्दर्भ में सर्वाधिकार सुरक्षित )
गुरुपूर्णिमा पर अशेष बधाई एवं शुभकामनाओं सहित सादर..नवीन श्रीवास्तव,लेखक एवं पत्रकार 🙏🙏🙏



