छत्तीसगढ़

सबके लिए हो नशाबंदी तभी …अदभुत चेतना शक्ति के साथ यह राष्ट्र उठ कर खड़ा हो सकता है

 

 

नशे की नसबंदी- किश्त-2

 

धार…एक अभियान( अनेक समाचारपत्र व पत्रपत्रिकाओं में 17 वर्षों से लगातार… विसंगतियों के खिलाफ एक शंखनाद )/नवीन श्रीवास्तव,लेखक एवं पत्रकार,बस्तर से)

 

नशा असहजता है..क्योंकि इसके शिकार ज्यादातर वही बनते हैं जो सहजता के प्रतीक है जैसे-बच्चें,बेटियां,स्त्री,बुजुर्ग ..!

 

सच तो यह है कि सृष्टि सौंदर्य,प्रेम पूर्ण जीवन में ऐसे उत्साह के रस हैं जिसे महसूस करने के बाद किसी नशे की जरूरत ही नहीं..पर हमने तो बाजारू षडयंत्र के चलते जीवन सौंदर्य को महसूस करने का अभ्यास छोड़ ही दिया है* ..मुख्यमंत्री श्री बघेल का कहना है कि नशाबंदी को लेकर वातावरण बनाना पड़ेगा ..सही है यथासंभव हम सबको अपने हिस्से की भूमिका निभानी पड़ेगी .. महत्वपूर्ण है पहल..व्यवस्था पर बैठे लोगों को कथनी करनी का भेद खत्म करना होगा .. अक्सर आपने देखा व सुना होगा कि शराबबंदी की बात होती है तो जिस आम आदमी को वीआईपी काफिले का हॉर्न ही धकिया देता है उनकी चिंता की जाती …सवाल उठाया जाता है कि अगर शराबबंदी कर दिया जाएगा तो आम लोगों के उस वर्ग का क्या होगा जो इसके आदी हैं …यह सवाल कम सवेंदनशील नहीं है..पर हमेशा आम लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने से बचने की जरूरत है जैसे पहले होता रहा है… समझिए ..नशाबंदी कभी भी हो.. नीचे से ऊपर के लोगों के बजाय करने के बजाय ऊपर से नीचे के लोगों में भी तो किया जा सकता है… *फिर जो नशा करे वह नशेबाज ही तो है क्या बड़ा आदमी ,क्या छोटा आदमी या क्या आम आदमी या फिर क्या कार्पोरेट से जुड़ा वर्ग ,धनिक,रईस वर्ग या फिर कोई नेता ,चेता के लोग …नशाबंदी तो सबके लिए है तभी …अदभुत चेतना शक्ति के साथ यह राष्ट्र उठ कर खड़ा हो सकता है* ..अगर ऊपर बैठे लोग नशे छोड़ने या उससे दूर रहते हैं या नशेबन्दी का संकल्प,अपील करते है तो बड़ी संख्या में नशा करने,शराब पीने वाले आम लोगों के बीच निश्चित रूप से बेहतर वातावरण बनेगा..पर इस पहल के लिए साहस कौन कर रहा या करेगा यह देखना महत्वपूर्ण हो सकता है।

 

यह भी एक सच नहीं है क्या कि नशेबन्दी कर दिया जाये या *शराबबंदी हो तो पूल पार्टी में चाशनी काटने वालों का क्या होगा … और दूसरों की जिंदगी को शराब में डुबोने वाले दल्लों की तो पेट के नीचे की झाड़ (नाभि)सूख जायेगी*..!(जारी..)

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