जल ,जंगल ,जमीन बस्तरवासीयों का अधिकार, अन्याय ना करें राज्य व केंद्र सरकार– मुक्ति मोर्चा

समवैधानिक मुल्यों को ताक में रख, आमदई लौह खदान ,निक्को कम्पनी को देना, बस्तर के साथ राज्य सरकार का विश्वासघात- मुक्ति मोर्चा
कम्पनी के लीज हेतु ग्रामसभा प्रतिवेदन की जांच व लौह उत्खनन हेतु पहाड़ में लगे केम्प उतारने की मांग पर संर्घष समिति से चर्चा करें राज्य सरकार–मुक्ति मोर्चा
बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में स्थित ओरछा ब्लाक में आमदई लौह पहाड़ को संवेधानिक मुल्यों को ताक में रख दबाव बनाकर किये गये फर्जी ग्रामसभा के आधार पर राज्य सरकार द्वारा लौह उत्खनन हेतु निक्को कम्पनी को लीज दिए जाने व उत्खनन कार्य प्रारंभ करने हेतु पहाड़ में केम्प लगाये जाने के विरोध में विगत 15 दिनों से अधिक जिले के कई ग्राम पंचायत से पहुंचे ,40हजार से अधिक ग्रामवासी द्वारा राज्य सरकार से न्याय की गुहार हेतु बस्तर का सबसे बड़ा आंदोलन स्थानीय संर्घष समिति द्वारा किया जा रहा है। समिति के आंमत्रण पर आंदोलन के जायज मांगों को बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के संभागीय संयोजक नवनीत चांद के नेतृत्व में आंदोलनकारियों के बीच पहुंच समर्थन देते हुए कहां की जल जंगल, जमीन बस्तरवासीयों का अधिकार है। इसके साथ अन्याय करना राज्य व केंद्र सरकार बंद करें। बयान में आगे कहां की लौह उत्खनन ही बस्तर का विकास का पैमाना है। तो सन 1965 से बैलाडीला की पहाड़ियों से लौहा उत्खनन कर लें जा रहा है। तो क्यों ?आज तक बस्तर को वास्तविक व अधिकार का विकास नहीं मिला ,बस्तर में रोजगार के सपनों को दिखाकर नगरनार स्टील प्लांट की आधारशिला रखी गई थी।जिसे आज बस्तर के लोगों के विश्वास को तोड़कर केंद्र के द्वारा राज्य सरकार की खामोशी के चलते डी मर्जर की प्रक्रिया के तहत निजीकरण करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसकी कोई सुनवाई बस्तर के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से राज्य सरकार के समक्ष नहीं हो रही है।दुसरी तरफ फिर बस्तरवासीयों को रोजगार के नाम पर सपनों को दिखा आमदई खदान को, निजी कंपनी के माध्यम से लुटने का षड़यंत्र सरकार ने रचा है। जिसके तहत नारायणपुर जिला के ओरछा ब्लाक में प्रभावित ग्राम पंचायतों पर दबाव बना संवैधानिक मुल्य को ताक में रख संदेहास्पद ग्राम सभा के पत्र के आधार पर लौह उत्खनन हेतु लीज सरकार ने पिछले दरवाजे से दे दिया है। और प्रभावितों को भयभीत करने के लिए पहाड़ में वे वजह की केंम्प लगा माहौल को गरमाया जा रहा है। जो बस्तरवासीयों के मुल भावानाओं के खिलाफ राज्य सरकार का अनुचित कदम है। वहीं मुक्तिमोर्चा बस्तर जिला संयोजक भरत कश्यप ने कहा कि ठिटूरती भरी इतनी ठंड में 12 दिनों से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी तकलीफों को झेल रहे हजारों ग्रामवासियों के बीच स्थानीय विधानसभा सभा व बस्तर के बड़े जनप्रतिनिधियों का अब तक ना पहुंचना व उत्पन्न समस्या व मांगों पर कोई पहल ना करना राज्य सरकार व केंद्र सरकार की असली चेहरे को उजागर करता है जिसका बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा कड़ी निन्दा करते हुए, राज्य सरकार से ये अपिल करता है। कि संर्घष समिति की जायज मांगों पर संभागीय कमेटी बना उपयुक्त चर्चा कर उनकी आपत्तियों पर निस्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्यवाही कर उत्पन्न समस्याओं का निराकरण करें। समर्थन के कार्यक्रम में कांकेर जिला अध्यक्ष रोशन सचदेव, नारायणपुर जिला संयोजक बलीराम कछलाम व अन्य स्थानीय पद अधिकारी संघर्ष समिति सदस्य भी उपस्थित थे



