कोई बड़ी रियायत नहीं, चौंकाने वाली घोषणा नहीं फिर भी सभी को साध लिया सरकार ने

छत्तीसगढ़ में मौजूदा सरकार के आखिरी बजट को नाम दिया गया था भरोसे का बजट। 8 महीने बाद चुनाव है। ऐसे में प्रदेश सरकार से इसमें किसी चौंकाने वाली बड़ी रियायत, बड़ी घोषणा की उम्मीद थी जिससे कि इसे चुनावी बजट कहा जा सके। सीधे तौर पर ऐसा नहीं हुआ, लेकिन अगर बजट के बिंदुओं को गौर से देखें तो यह पूरी तरह वोटर्स को ध्यान में रखकर बनाया हुआ दिखता है। सरकार का स्पष्ट फोकस गांव, महिलाएं और युवा हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को जब अपना पांचवा बजट सदन में पेश किया तो उसकी दो सबसे बड़ी बातें पहले से ही मालूम थी। एक, की सरकार किसी टैक्स में बढ़ोतरी नहीं करेगी, कोई नया टैक्स नहीं लगाएगी और दूसरी, बेरोजगारी भत्ते को विधिवत लागू करने की घोषणा करेगी। कुछ और बड़े निर्णय जिनका इंतजार था उनमें अनियमित, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, पेंशन स्कीम, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा, गरीबों के लिए नयी आवास योजना जैसी बातें थीं, लेकिन इनकी बात नहीं हुई।

बजट का सर्वाधिक हिस्सा शिक्षा को दिया गया 19 हजार 500 करोड़ रुपए के आसपास। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास और कृषि का हिस्सा है। ये तीनों विभाग मुख्यतः गांवों में काम करते हैं। तीनों को मिले बजट को अगर मिला लें तो यह हो जाता है करीब 40 हजार करोड़ रुपए जो राज्य के इस साल के पूरे बजट का 35-37 प्रतिशत है। जाहिर है सरकार का फोकस गांव पर है, ग्रामीणों पर है। इसी विचार से सरकार ने धार्मिक भावनाओं वालों का भी ध्यान रखा है। अब थोड़ा विस्तार से समझते हैं कि कैसे सरकार ने आने वाले चुनाव को देखते हुए वोटर्स का भरोसा जीतने की कोशिश की है…

बेरोजगारी भत्ते से युवाओं तक पहुंचेगी सरकार
प्रदेश में कितने युवा बेरोजगार हैं, इसकी कोई संख्या या परिभाषा अभी स्पष्ट नहीं है। सरकार ने जो ढाई हजार रुपए महीने, दो साल तक बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही है उसमें एक ही शर्त अभी तक सामने आई है कि युवा के परिवार की वार्षिक आय ढाई लाख से कम होनी चाहिए। इस आय वर्ग के बहुत सारे युवा छत्तीसगढ़ में हैं। यह बड़ा मतदाता वर्ग है जिसके वोट किसी पार्टी के नहीं खुद को मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। लिहाजा सरकार ने इस सीधी मदद के जरिए उन तक यह संदेश पहुंचाया है कि सरकार उनकी चिंता कर रही है।

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