एक मिनट में जितना चाहो, उतना खाओ पिज्जा, ऐसे ऑफर बना रहे हैं लोगों को बीमार…

रायपुर। आजकल फास्ट फूड बिजनेस काफी ट्रेंड कर रहा है. लोग अलग-अलग तरह से फास्ट फूड बनाकर मशहूर भी हो रहे हैं. बड़े पैमाने पर फास्ट फूड रेस्टोरेंट में ऑफरों की भरमार खोल रखी है. इससे वे अच्छे खासे पैसे कमा रहे हैं. फैमस होने पर फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाले सामानों को भी बेच रहे हैं. ऑफर वाला ये भोजन लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है. ऑफरों के चक्कर में यूथ आपस में भी शर्त लाकर अपना स्वास्थ्य खराब कर रहे हैं.

फास्ट फूड या जंक फूड का प्रयोग सबसे पहले 1972 में किया गया. इसका मकसद था ज्यादा कैलोरी और कम पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थों की तरफ लोगों का ध्यान खींचना. समय के साथ लोगों की इसमें रुचि बढ़ गई. पिज़्जा, बर्गर, नूडल्स और कोल्ड्रिंक्स आदि का सेवन लोगों के लिए रोज का आहार हो गया है. खासकर स्टूडेंट्स तो फूड रेस्तरां पर ही नजर आते हैं. इसकी एक बड़ी वजह इन फास्ट फूड रेस्तरां की ओर से दिए जाने वाले ऑफर हैं, जिसके लालच में पड़कर लोग आदतन होते जा रहे हैं.

एक मिनट में जितना चाहो उतना पिज्जा खाओ

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियों की भरमार है यहां ग्राहकों को लुभावने ऑफर से अपनी ओर खींचा जा रहा है. चाहे गोलगप्पे हो या पिज्जा एक मिनट वाला ऑफर दिखकर लोगों की जेब खाली की जा रही है, क्योंकि सामान्यता: फास्ट फूड के इन ऑफरों को लोग पूरा नहीं कर पाते हैं. लेकिन जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं. लालच रहता है कि आज नहीं कर पाए तो कल आकर शर्तों को पूरा कर ही लेंगे. इस नए मार्केटिंग ट्रेड से कुछ लोगों को तो ईनाम मिल जाता है, पर अधिकतर शर्तों को पूरा नहीं कर पाते, और अपनी तबीयत खराब कर लेते हैं.

6 हजार खाने की चीजों पर हुई रिसर्च

नेचर फूड जर्नल में पब्लिश हुई इस स्टडी के मुताबिक, यह स्टडी व्यक्ति के जीवन की अच्छी गुणवत्ता पर आधारित थी. स्टडी में वैज्ञानिकों ने करीब 6 हजार अलग-अलग चीजों (नाश्ता, लंच और ड्रिंक) की जांच की. उन्होंने पाया कि यदि कोई व्यक्ति जो प्रोसेस्ड मीट खाता है तो वह प्रति दिन अपनी लाइफ में 48 एक्स्ट्रा मिनट जोड़ सकता है.

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