AAP ने बढ़ाई BJP की चिंता; मोदी मैजिक से उम्मीद

गांधीनगर। 2017 के विधानसभा चुनावों में गुजरात में पाटीदारों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को खूब छकाया था। इस समुदाय के बीच सरकार को लेकर नाराजगी थी। इस पूरे आंदोलन की अगुवाई हार्दिक पटेल सरीखे नेता कर रहे थे, जो कि इस चुनाव में भगवा खेमे में शामिल हो चुके हैं। सौराष्ट्र में गुरुवार को मतदान होगा। गुजरात के कृषि बहुल क्षेत्र पर सियासी पंडितों और राजनीतिक दलों की पैनी नजर है। ऐसा इसलिए कि यह अन्य हिस्सों से अलग तरीके से मतदान करने के लिए जाना जाता है।
सौराष्ट्र में 11 जिले शामिल हैं। इस इलाके में अमरेली, मोरबी, राजकोट, सुरेंद्रनगर, जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, भावनगर और बोटाद जैसे जिले आते हैं। 2017 के बाद इन जिलों में राजनीतिक परिदृश्य में भारी बदलाव आया है। यह क्षेत्र भाजपा विरोधी पाटीदार आंदोलन का उद्गम स्थल था। पाटीदार आंदोलन के अलावा इन इलाकों में दलित और ओबीसी आंदोलन भी हुए हैं। कांग्रेस ने इन आंदोलनों को भुनाया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस बेल्ट में अपनी सीटें 16 से बढ़ाकर 30 कर ली थी। बीजेपी को खासा नुकसान हुआ था। भगवा पार्टी के पास 2012 के चुनावों में 35 सीटें थीं, जो कि 2017 में 23 हो गई थी। बीजेपी को 2017 के चुनावों में गिर सोमनाथ, मोरबी और अमरेली के तीन जिलों में एक भी सीट नहीं मिली थी।
सत्ता विरोधी लहर
भाजपा 27 साल की सत्ता विरोधी लहर का खामियाजा भुगत रही है। इसके अलावा भगवा पार्टी को बढ़ती महंगाई, जीएसटी, सड़कों की खराब स्थिति और अन्य मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जामनगर के प्रतीकभाई कहते हैं, “राजस्थान को देखिए जो हर पांच साल में अपनी सरकार बदल लेता है। इससे राज्य के लोगों को फायदा होता है, क्योंकि पार्टियों पर लगाम लगाई जाती है। वे लोगों के कल्याण के लिए काम करते हैं।”
कांग्रेस की कमजोरी का भाजपा को फायदा
इस विधानसभा चुनाव में गुजरात में कांग्रेस कमजोर लड़ाई लड़ रही है। अर्जुन मोधवाडिया और विक्रमभाई मादाम सहित कांग्रेस के स्थानीय मजबूत नेता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर नहीं बल्कि अपनी लोकप्रियता पर निर्भर हैं। कांग्रेस के 20 विधायकों ने बीते पांच वर्षों में भाजपा का दामन थामा था। उनमें से आधे सौराष्ट्र क्षेत्र से हैं। इस चुनाव में ज्यादातर को बीजेपी ने टिकट दिया है।
आम आदमी पार्टी की उपस्थिति
सभी 182 सीटों पर आम आदमी पार्टी की मौजूदगी ने इस चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। दिल्ली की पार्टी गुजरात में मुफ्त का वादा कर रही है। वैसे मतदाता जो पिछले तीन दशकों में कांग्रेस और भाजपा के बीच झूल रहे हैं, उनके लिए आप एक नया विकल्प प्रदान कर रही है। पार्टी ने पाटीदार आंदोलन से जुड़े कई नेताओं को अपने पाले में किया है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदन गढ़वी को खंभालिया सीट से मैदान में उतारने से इस क्षेत्र में आप की स्थिति और मजबूत हुई है। आप के द्वारा कांग्रेस के मुस्लिम वोट को काटने की भी संभावना है। हालांकि, बिलकिस बानो बलात्कार मामले में दोषियों की रिहाई पर आप की चुप्पी केजरीवाल की पार्टी को परेशान कर सकती है।
युवाओं के मुद्दा
गुजरात में युवाओं के साथ सबसे बड़ा मुद्दा पेपर लीक है। कांग्रेस के मुताबिक, गुजरात में करीब 22 पेपर लीक हुए हैं।



