बस्तर का साहित्य हुआ समृद्ध साहित्य एवं कला जगदलपुर’ द्धारा शहर के चेम्बर भवन में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन

जगदलपुर।साहित्य के विकास लिये समर्पित संस्था ’साहित्य एवं कला जगदलपुर’ द्धारा शहर के चेम्बर भवन में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। बस्तर अंचल के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार सुरेन्द्र रावल के व्यंग्य संग्रह ’हम फिर चूक गये’, श्रीमती ज्योति चौहान के संस्मरण संग्रह ’गलियारे’ और बस्तर अंचल के कवियों के साझा काव्य संग्रह अरण्यधारा-5 व अरण्यधारा-6 का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्य कला समाज के संरक्षक विद्वान शिक्षक, लेखक श्री बी एन आर नायडू एवं समाजसेवक लेखक श्री जयचंद्र जैन के साथ मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री सुरेन्द्र रावल व विशिष्ट अतिथि सुश्री वैशाली मरड़वार, डेप्युटी डायरेक्टर सोशल वेलफेयर थीं।
प्रथम सत्र में साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर के अध्यक्ष सनत जैन ने मंच संचालन करते हुये मंचस्थ अतिथियों के द्वारा किये कार्यो पर प्रकाश डाला एवं साहित्य एवं कला समाज के प्रकाशन का उद्देश्य बताया कि बस्तर के साहित्यकारों को जोड़ने के लिये अरण्यधारा सीरिज का प्रकाशन किया जा रहा है।
ज्योति चौहान की पुस्तक गलियारे की समीक्षा समीक्षक श्री अवधकिशोर शर्मा द्वारा की गयी। उन्होंने लेखिका के लेखन को भावप्रवण बताया और व्यक्ति को अपने प्रत्येक संबंधों के प्रति लेखिका की तरह ईमानदार रहने व संवेदनशील होने की बात कही। सनत जैन ने अपनी समीक्षा में कहा कि जो व्यक्ति गरीब कामवाली के संस्मरण को अपनी पुस्तक में स्थान दे सकता है इसका मतलब वह व्यक्ति वास्तव में साहित्य को जीता है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में व्यंग्यकार सुरेन्द्र रावल की पुस्तक ’हम फिर चूक गये’ के लोकार्पण के अवसर पर अध्यक्ष शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. बी एल झा, मुख्य अतिथि व्यंग्यकार श्री सुभाष पाण्डे, विशिष्ट अतिथि चित्रकार श्री बंशीलाल विश्वकर्मा मंचस्थ थे। सत्र का संचालन करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार हिमांशु शेखर झा ने व्यंग्य लेखन की विशेषताओं को रेखांकित किया। और लेखक की विभिन्न विषयों पर लिखी व्यंग्य कथाओं का स्मरण किया।
सुभाष पाण्डे ने कहा कि व्यंग्य हमारे आसपास बिखरे हैं बस आपकी दृष्टि उन्हें खोजने वाली होनी चाहिये। डॉ बी एल. झा एवं बंशीलाल विश्वकर्मा ने लेखक को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सुरेन्द्र रावल ने अपने वक्तव्य में कहा कि मेरी भावनाएं आज भी जगदलपुर से जुड़ी हैं इसलिये अपनी इस पुस्तक का लोकार्पण जगदलपुर में अपने मित्रों और चाहने वालों के साथ कर अपनी खुशियां बांट रहा हूं।
बस्तर संभाग के कवियों के साझा संकलन अरण्यधारा में प्रकाशित रचनाकारों को अरण्यधारा सम्मान से सम्मानित किया गया।
बस्तर पाति द्वारा हर वर्ष बस्तर की पावन धरा से जुड़े साहित्यकारों एवं कलाकारों के योगदान को रेखांकित करते हुये बस्तर पाति सम्मान प्रदान किया जाता है। इसी कार्यक्रम में बस्तर पाति विशिष्ट सम्मान वर्ष 2019 के लिये स्व. रउफ परवेज जी (साहित्य-जगदलपुर) को, 2020 के लिये श्री बंशीलाल विश्वकर्मा जी (चित्रकला-जगदलपुर) को एवं 2021 के लिये श्री सुरेन्द्र रावल जी (व्यंग्य साहित्य-कोण्डागांव) को प्रदान किया गया। बस्तर पाति सफल सम्मान 2019 के लिये श्री विक्रम सोनी (लोक साहित्य-जगदलपुर) को, 2020 के लिये श्री अवध किशोर शर्मा (समीक्षा-जगदलपुर) को एवं 2021 के लिये श्री शैलेन्द्र शर्मा (गजल-दंतेवाड़ा) को प्रदान किया गया। बस्तर पाति उज्जवल सम्मान वर्ष 2019 के लिये श्री दिनेश विश्वकर्मा (गजल-कोण्डागांव), वर्ष 2020 के लिये श्रीमती करमजीत कौर (कहानी-जगदलपुर) एवं 2021 के लिये सुश्री गरिमा पोयाम (काव्य लेखन-कांकेर) को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में जगदलपुर कें अलावा बिलासपुर, रायपुर, भानपुरी, कोण्डागांव, केशकाल, बचेली, नारायणपुर एवं कांकेर के रचनाकारों ने शिरकत की।
अंत में सुरेन्द्र रावल जी के सुपुत्र धमेन्द्र रावल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में साहित्य एवं कला समाज के पदाधिकारी, उपाध्यक्ष नरेन्द्र पाढ़ी, सचिव ममता जैन, सह सचिव कृष कर्तव्य रामटेके आदि उपस्थित थे।

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