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श्राद्ध पक्ष 7 सितंबर से शुरु – पूर्वजो को प्रसन्न करने के लिए किन बातो का रखे विशेष ध्यान- 

रायपुर छत्तीसगढ मेघा तिवारी

 

उज्जैन के ज्यो.पं अंकित दुबे ने बताया कि

पितृपक्ष में पित्रों को प्रसन्न करने के लिए सोलह दिवस उन्हें जलांजलि दी जाती हे, प्रतिदिन तर्पण करना चाहिए एवं

उनकी तिथि पर श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए यदि कोई प्रतिदिन तर्पण नहीं कर सकता हे तो सर्वपितृ अमावस्या पर किसी भी तीर्थ में जाकर उनके नाम से तर्पण अथवा पिंडदान करना चाहिए,उज्जैन,हरिद्वार,गया जी, प्रयागराज जैसे तीर्थों में इसकी महत्वता हे। पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना शास्त्रोक्त वर्जित हे। शास्त्र अनुसार पितृ केवल सोलह दिवस ही धरती पर रहते हे, जितना हम पित्रों को जल देंगे वह उतनी ही हमें शीतलता प्रदान करेंगे।

 

पितृपक्ष में हम कोई भी शुभ कार्य नहीं कर सकते हैं या कोई भी नई वस्तु नहीं ले सकते हैं जैसे गाड़ी हो गई या फिर वस्त्र हो गए या कोई सी भी वस्तु हम नहीं खरीद सकते हैं । एवं पितरों के निमित्त हमें जितना हो सके उतना दान पुण्य करना चाहिए ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिए हमारे पितरों की तिथि पर हमें एक तीन ,पांच,ग्यारह ब्राह्मणों को भोज करवाना चाहिए अथवा गाय को रोटी देना चाहिए स्वान को रोटी देना चाहिए कोई मांगने वाला आ जाए उसे भोजन कराना चाहिए ।

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