CM भूपेश माओवादियों से वार्ता पर बोले- देश के संविधान पर विश्वास जताएं नक्सली, फिर किसी भी मंच पर बातचीत

छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने माओवादियों से वार्ता के मुद्दे पर कहा कि नक्सली पहले भारत के संविधान पर विश्वास व्यक्त करें। उसके बाद उनसे किसी भी मंच पर बातचीत की जा सकती है। नक्सली यह बताएं कि संविधान पर विश्वास करते हैं या नहीं करते। सीएम ने कहा कि साढ़े 3 सालों में नक्सली सिमट गए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें, रोजगार सभी काम हो रहे हैं। नक्सली अब बीजापुर व नारायणपुर के माड़ इलाके में बचे हैं।
बता दें कि एक दिन पहले माओवादी संगठन ने प्रेस नोट जारी कर कहा था कि वह सरकार से बातचीत को तैयार है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) प्रवक्ता विकल्प ने प्रेस नोट में माओवादी संगठन की शर्तें भी रखी है। नक्सली संगठन के बयान पर भूपेश ने कहा कि नक्सली पहले भारत के संविधान पर विश्वास व्यक्त करें। उसके बाद उनसे किसी भी मंच पर बातचीत की जा सकती है। भूपेश ने कहा कि सरकार की नीति विकास, विश्वास और सुरक्षा के चलते ही लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है। इसी कारण से नक्सली बहुत पीछे चल गए हैं। उन्होंने कहा, राज्य सरकार की योजनाओं ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासियों का दिल जीता है। अब लोग वहां सड़कें बनाने और कैंप खोलने की मांग कर रहे हैं।
एक छोटे से क्षेत्र में सिमटकर रह गए नक्सली
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि राज्य सरकार की नीति से अब नक्सली एक छोटे से क्षेत्र में सिमटकर रह गए हैं। भूपेश ने कहा कि फोर्स अपना काम कर रही है। आक्रमण होगा तो जवान छोड़ेंगे नहीं। पिछली सरकार में कैंपों पर हमला होता था। नक्सली कैंप पर हमला करते थे। अब हमारे जवान आमने-सामने की लड़ाई लड़ रहे हैं। फोर्स के दबाव में नक्सली सरेंडर कर रहे हैं या फिर मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं। पहले कैंप बफर जोन में खुलता था, अब तो उनकी मांद में कैंप खुल रहे हैं। मिनपा, सिलगेर सहित कई कैंप कोर एरिया में खोले गए हैं।



