महावीर भवन में जीने की राह का हुआ विमोचन


जगदलपुर
जीने की राह का हुआ विमोचन
जगदलुपर शहर का महावीर भवन पुनः साक्षी बना बस्तर के प्रसिद्ध चिंतक जयचंद्र जैन के दूसरे चिंतन संग्रह के विमोचन का। लगभग लोग लिखना पढ़ना छोड़ देते उस वक्त जयचंद्र जी ने लिखना आरम्भ किया। इस बात को रेखांकित करते हुये विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बस्तर विश्वविद्यालय के विद्वान कुलपति डॉ शैलेन्द्र कुमार सिंह जी ने रामचरित मानस के लेखक तुलसीदास जी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने पचहत्तर वर्ष से अधिक की आयु में लेखन आरम्भ करके एक अमर कृति समाज को प्रदान की।
जगदलपुर नगर निगम आयुक्त श्री प्रेम कुमार पटेल जी ने साहित्यकारों के द्वारा सामाजिक परिवर्तन के सामर्थ्य को रेखांकित किया। और जगदलपुर में स्वच्छता अभियान के लिये आह्वान किया।
अतिथि रूप में रायपुर से पधारे विद्वान साहित्यकार, विभिन्न भाषाओं के जानकार, डॉ चितरंजन कर जी ने जयचंद्र जैन साहित्य को समाज के लिये अनमोल कृति बताते हुये सरल, सहज और बोधगम्य और प्रत्येक के पढ़ने के लिये आवश्यक बताया।
समाजसेवी, माता रूकमणी आश्रम डिमरापाल से पधारे बस्तर के गांधी पद्मश्री धर्मपाल सेनी जी ने अपनी लम्बी समीक्षा में यह कहा कि जयचंद्र जी द्वारा रचित जीने की राह एक आवश्यक और समयानुकूल कृति है। परिवार और समाज के हित के लिये इस तरह का साहित्य सतत लिखा जाना चाहिये।
बस्तर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक डॉ कौशलेन्द्र मिश्र जी ने कृतित्व पर चर्चा करते हुये साहित्य की महत्ता और जीने की राह में रचित लेखों को आपस में जोड़कर श्रेष्ठ कृति बताया।
विमोचन कार्यक्रम में अतिथि बनकर रायपुर से आयीं वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती माधुरी कर जी ने अपनी श्रेष्ठ कविताओं का वितरण उपस्थित जनों में किया।
शहर के प्रसिद्ध व्यंग्यकार शशांक श्रीधर शेण्डे ने जयचंद्र जी के जीवन पर अपने अनोखो अंदाज प्रकाश डाला। और विशेष रूप से बताया कि उनकी जब जयचंद्र जी से पहली बार भेंट हुई थी तब उनको आश्चर्य हुआ कि जयचंद्र जी एकदम स्पष्ट साफ साफ शब्दों का उच्चारण करते हैं और शुद्व हिन्दी का प्रयोग कर अपनी बात रखते हैं।
मंच का संचालन करते हुये साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर के अध्यक्ष सनत जैन ने अतिथियों का परिचय करवाया, जानकारी दी कि इस क्षेत्र में एक ही मंच पर इतने विद्वानों की एकत्रित होने की अद्भुत घटना है। इस मंच पर विराजमान समस्त जन अपने अपने क्षेत्र के जिद्दी यानी दृढ़संकल्पित लोग हैं। ताऊजी यानी सैनी जी ने अपना जीवन बालिका शिक्षा के लिये समर्पित कर दिया। तो डॉ चितंरजन कर सर ने अपना जीवन भाषा सीखने जानने में खपा दिया। नगर निगम आयुक्त पटेल सर ने स्वच्छता के लिये स्वयं को समर्पित कर दिया है। डॉ कौशलेन्द्र सर ने आयुर्वेद को जानने और राष्ट्र के हित के लिये चिंतन को समर्पण किया है। माधुरी कर मैडम ने काव्य लेखन को जन जन तक पहुंचाने के लिये अपनी रचनाओं को समाज में वितरण करने का संकल्प लिया है। वैसे ही जयचंद्र जी ने स्वयं को इस उम्र में आकर समाज के लिये लेखन के लिये समर्पित किया है।
शहर के अनेक साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों से भरे सभागार में सम्पन्न इस विमोचन कार्यक्रम में माता रूकमणि आश्रम डीमरापाल की छात्राओं द्वारा सुंदर स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उपलब्धि प्राप्त महिलाओं का सम्मान किया गया। प्रमाणपत्र, शॉल, श्रीफल द्वारा माता रूकमणि आश्रम के क्रिकेट और व्हालीबॉल टीम की खिलाड़ियों का सम्मान किया गया।
कौन बनेगा करोड़पति की विजेता सुश्री अनूपा दाश, युवा पर्वतारोही सुश्री नैना धाकड़, शिक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन हेतु गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली श्रीमती आस्था जैन का सम्मान किया गया। आभार प्रदर्शन श्रीमती रमा जैन ने किया।
आमंत्रित अतिथियों के लिये स्वरूत्रि भोज की व्यवस्था जैन परिवार के द्वारा की गयी थी।



