मैंने प्यार किया है दर्दे दिल उधार ले लो ।फरिश्ते भी अक्सर मेरा पता पूछते हैं।।

वेलेंटाइन डे..बीत जायेगा..पर प्रेम का महा उत्सव जारी रहेगा…

धार…एक अभियान(प्रेम पर 3 री किश्त)नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,बस्तर

दो शब्द :- प्रेम …पर मैंने बहुत कुछ पाया है..पूरी जिंदगी भी लिखता रहूं ,बांटता रहा ..तो यह सिलसिला खत्म नहीं होने वाला .. इसलिये इस तीसरी किश्त के साथ फिलहाल इस स्तंभ को यही विराम देता हूँ किसी नए विषय पर मिलता रहूंगा..

आरंभ :- आखिर यह वेलेंटाइन डे…बीत जाएगा.. यह तो होना ही है क्योंकि यह आयोजन हमारा है..पर प्रेम का महा उत्सव तो जारी है..अनवरत..लगातार.कोई कुछ भी कर ले यह तो शाश्वत है..भला हम कौन होते हैं जो प्रेम के लिए एक दिन चुनें…सुनो कभी भी गलतफहमी में मत रहना, किसी को अहंकार से मत कहना कि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ..तुम नहीं कर सकते कभी भी यह तुम्हारे सामर्थ्य से परे है.. प्रेम ही चुनता है हमें अपने लिए..हमारे बस में नही की हम इसे चुनें क्योंकि हमारा क्या है…जो भी सुंदर दिखे हम उसे पाना चाहते हैं पर ऐसे में तो गड़बड़ हो जायेगा प्रेम यह समझता है… इसलिए वही चुनता है हमें और जब प्रेम हमें चुनता है तो ..जीवन उत्सव में तब्दील हो जाता है..आनन्द की शहनाइयाँ.. बज उठती है..बिना बूंदों की ऐसी बरसात होती है कि बदन भले ना भीगे..गीला ना हो पर आत्मा पवित्र हो जाए.. रूह पाक हो जाए.. ऐसा आमंत्रण आपके लिए भी हो सकता है बस सारे अहंकार का विसर्जन कर ह्र्दय का द्वार खुला रखें ..फिर सम्भव है कि प्रेम आपको चुन ले..जब बिना किसी से पाने की इच्छा..खुशियां बांटने का मन करे…लगे कि अब कुछ पाने की ख्वाईश नहीं तो समझ लेना ..समझ लेना ..प्रेम तुम्हें चुन रहा..यह अद्भुत होता है ..जश्न बेला है अमृत वर्षा यह सौंदर्य से भरा संसार तुम्हें स्वीकार कर रहा..कोई इसे नहीं रोक सकता ..इसलिए की तुम बांटने योग्य हुए.जाओ..ह्र्दय..ह्र्दय भाप की तरह उड़ रहे संवेदनाओं को सहेजो..आत्मीयता का मिठास भरा रस घोल दो हवाओं में..ताकि प्रेम के खिलाफ षड़यंत्र करने के साथ..नफरत फैलाने वाले तिलचट्टों पर कहर टूट पड़े।।

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