गहलोत सरकार मंत्रिमंडल विस्तार में नए पेंच, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर दारोमदार

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में जमे हुए हैं। वहीं राज्य में पंजाब जैसे हालात न हों इसलिए गांधी परिवार भी सक्रिय हो गया है। हालांकि इस बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में अब पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का पेंच फंस गया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोई व्यापक मंत्रिमंडल विस्तार किए जाने के पक्ष में नहीं है तो वहीं सचिन पायलट अब मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल को लेकर अड़े हुए हैं और 2 साल के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दिए जाने के पक्ष में हैं। उधर, पायलट ने दौसा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि अगला चुनाव जीतना है तो कांग्रेस संगठन और सरकार को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि जिन कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पिछली बार सत्ता दिलाई है, उनको मान सम्मान मिलना ही चाहिए।
विस्तार और फेरबदल में उलझा मामला
जानकारी के अनुसार, सीएम अशोक गहलोत फिलहाल विस्तार के पक्ष में तो नजर आ रहे हैं लेकिन वे 9 से ज्यादा खाली पदों पर ही मंत्री बनाए जाने की बात कह रहे हैं। जबकि हाईकमान ठीक से काम नहीं करने वाले मंत्रियों को हटाकर मंत्रिमंडल में फेरबदल करने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बैठक में गुजरात प्रभारी रघु शर्मा और पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी के साथ प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को मंत्री बनाए रखने या न रखने पर भी चर्चा हुई है।
बैठक में प्रभारियों को लेकर यह कहा गया कि भाजपा ने भी केंद्रीय मंत्रियों को राज्य का प्रभारी बना रखा है इसलिए मंत्रियों को भी संगठन की जिम्मेदारियों के साथ अपने पदों पर बरकरार रखा जाए। इसके अलावा एक व्यक्ति, एक पद वाले फॉर्मूला लागू करने को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। अगर ये फॉर्मूला लागू हुआ तो इसका सबसे ज्यादा असर सीएम गहलोत के गुट पर पड़ेगा, क्योंकि ऐसे में उनके समर्थक मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है। हालांकि, इस पर भी फैसला सोनिया गांधी के स्तर पर ही होने की संभावना है।
सचिन पायलट की भूमिका पर भी चर्चा
जानकारी के मुताबिक राजस्थान के मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में सचिन पायलट कैंप के विधायकों-मंत्रियों को भी जगह मिलेगी। पायलट खेमे ने चार से छह मंत्रियों की मांग की थी। लेकिन उनके गुट से 3 से 4 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं संकट के समय सरकार का साथ देने वाले निर्दलीय विधायकों को भी मंत्री बनाया जा सकता है। बसपा छोड़ कांग्रेस में आने वाले विधायकों को भी एडजस्ट किया जा सकता है। जबकि मंत्री नहीं बनने की स्थिति में विधायकों को कहां एडजस्ट किया जाए इसका फॉर्मूला भी हाईकमान के साथ तय किया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो हाईकमान ही तय करेगा कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की भूमिका प्रदेश में क्या रहने वाली है। इसे लेकर प्रदेश प्रभारी अजय माकन और केसी वेणुगोपाल सोनिया गांधी से सलाह लेंगे। सचिन पायलट को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा या फिर उन्हें संगठन में क्या भूमिका दी जाएगी, इस पर भी चर्चा होनी है



