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त्योहारी बाजार में छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर उनकी रोजी-रोटी छीनना बंद करे निगम प्रशासन, पहले महापौर बताएं कहां गए तीन पार्किंग स्थल के वादे – राजेश चौधरी

 

 

 

 

त्योहारों के समय ही गरीब फुटकर व्यापारियों पर चलती है प्रशासन की कार्रवाई, सालभर इंतजार करने वाले ग्रामीण एवं आदिवासी व्यापारियों के लिए बाजार में जगह तक नहीं – नेता प्रतिपक्ष

 

जगदलपुर। नगर पालिक निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने त्योहारों के अवसर पर शहर में फुटकर एवं त्योहारी बाजार लगाने वाले छोटे व्यापारियों के विरुद्ध नगर निगम प्रशासन और यातायात विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर हर त्योहार के ठीक एक दिन पहले ही निगम प्रशासन और यातायात विभाग को बाजार की अव्यवस्था क्यों नजर आने लगती है? क्या शहर की यातायात व्यवस्था और बाजार प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी केवल गरीब फुटकर व्यापारियों की है? प्रशासन अपनी नाकामियों का ठीकरा छोटे व्यापारियों पर फोड़कर उन्हें उनके रोजगार से वंचित करने का प्रयास क्यों कर रहा है?

 

राजेश चौधरी ने कहा कि जगदलपुर शहर के आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में आदिवासी एवं ग्रामीण भाई-बहन वर्षों से त्योहारों के अवसर पर शहर में बाजार लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। इन छोटे व्यापारियों के लिए त्योहारी बाजार केवल दुकान लगाने का स्थान नहीं, बल्कि सालभर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। कई परिवार पूरे वर्ष इस बाजार का इंतजार करते हैं और अपनी थोड़ी-बहुत पूंजी लगाकर त्योहार के दौरान सामान बेचने शहर पहुंचते हैं। ऐसे में त्योहार के ठीक पहले निगम प्रशासन और यातायात विभाग द्वारा अचानक कार्रवाई करना, उन्हें दुकान लगाने से रोकना और बाजार से हटाना उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है।

 

उन्होंने कहा कि जब प्रशासन को पहले से मालूम है कि दीपावली, दशहरा और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान शहर में ग्रामीण एवं फुटकर व्यापारियों की संख्या बढ़ेगी, तो फिर समय रहते बाजार की व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती? हर वर्ष त्योहार आते हैं, बाजार सजते हैं और ग्रामीण व्यापारी अपनी दुकानें लगाने शहर पहुंचते हैं। इसके बावजूद निगम प्रशासन की ओर से कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती। अंतिम समय में कार्रवाई कर व्यापारियों को परेशान करना प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी और व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

 

महापौर पहले बताएं, कहां गए तीन पार्किंग स्थल बनाने के वादे?

 

राजेश चौधरी ने महापौर को उनके पुराने वादे की याद दिलाते हुए कहा कि लगभग दो वर्ष पूर्व शहर में तीन व्यवस्थित पार्किंग स्थल विकसित करने की घोषणा की गई थी। शहर की जनता को उम्मीद थी कि इससे यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बाजारों में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और आम नागरिकों को अपने वाहन खड़े करने के लिए उचित स्थान उपलब्ध होगा। लेकिन आज सवाल यह है कि महापौर द्वारा घोषित वे तीनों पार्किंग स्थल कहां हैं? क्या उनका निर्माण हुआ? यदि हुआ है तो वे जनता के उपयोग में क्यों नहीं हैं? और यदि नहीं हुआ है तो आखिर दो वर्षों में निगम प्रशासन ने इस दिशा में क्या काम किया?

 

उन्होंने कहा कि शहर में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने, बाजारों के लिए नियोजित स्थान निर्धारित नहीं करने और यातायात प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाने का खामियाजा अब छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बजाय गरीब व्यापारियों को हटाकर व्यवस्था सुधारने का दिखावा कर रहा है। महापौर को पहले अपने वादों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए, उसके बाद छोटे व्यापारियों को नियम और व्यवस्था का पाठ पढ़ाना चाहिए।

 

छोटे व्यापारियों को हटाने के बजाय व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराए प्रशासन

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगर निगम और यातायात विभाग का काम केवल चालानी कार्रवाई करना या छोटे व्यापारियों को हटाना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं को इस तरह संचालित करना है कि व्यापारियों के रोजगार और आम नागरिकों की सुविधा दोनों सुरक्षित रहें। त्योहारों के दौरान बाजार में भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है। इसके लिए पहले से योजना बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में बाजार स्थल निर्धारित किए जा सकते हैं। व्यापारियों को निर्धारित स्थान और समय आवंटित किया जा सकता है तथा आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता छोड़ा जा सकता है।

 

उन्होंने सुझाव दिया कि निगम प्रशासन त्योहारों से पर्याप्त समय पहले मुनादी करवाकर सभी व्यापारियों को बाजार लगाने के लिए निर्धारित स्थान, दुकान लगाने का समय, पार्किंग व्यवस्था और यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी दे। व्यापारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी जाएं और आपसी समन्वय से ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसी का रोजगार भी प्रभावित न हो और आम जनता को भी आवागमन में परेशानी न उठानी पड़े।

 

राजेश चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार और नगर निगम प्रशासन को गरीब, ग्रामीण एवं आदिवासी व्यापारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। ये व्यापारी कोई बड़े पूंजीपति या व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि अपनी छोटी-सी पूंजी और मेहनत के दम पर परिवार चलाने वाले मेहनतकश लोग हैं। त्योहारों के समय उनके सामने रोजगार के अवसर सीमित होते हैं। ऐसे समय में उन्हें सहयोग और सुविधाएं देने के बजाय कार्रवाई के नाम पर परेशान करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि शहर के विकास और यातायात व्यवस्था के नाम पर गरीबों की रोजी-रोटी छीनना समाधान नहीं हो सकता। यदि कहीं अव्यवस्था है तो उसका स्थायी समाधान निकालना निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है। बड़े प्रतिष्ठानों, पार्किंग की कमी और बाजारों के अनियोजित संचालन जैसे विषयों पर भी प्रशासन को गंभीरता से काम करना चाहिए। केवल फुटकर व्यापारियों को निशाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

 

नेता प्रतिपक्ष ने की मांग

 

राजेश चौधरी ने नगर निगम प्रशासन एवं महापौर से मांग की है कि त्योहारी बाजार में दुकान लगाने वाले छोटे, फुटकर एवं ग्रामीण आदिवासी व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान करने और अचानक हटाने की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए।छोटे व्यापारियों के लिए शहर में व्यवस्थित एवं सुविधाजनक बाजार स्थल निर्धारित किया जाए।त्योहारों से पहले व्यापारियों को मुनादी के माध्यम से निर्धारित स्थान, समय और नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जाए।महापौर अपने तीन पार्किंग स्थल विकसित करने के वादे पर अब तक हुई कार्रवाई का जवाब जनता के सामने रखें।शहर में पार्किंग और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाई जाए।

अंत में राजेश चौधरी ने कहा कि नगर निगम प्रशासन को यह समझना होगा कि शहर की व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर गरीबों का रोजगार उजाड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। त्योहार खुशियों और खुशहाली का अवसर होते हैं, लेकिन यदि छोटे व्यापारियों को इसी समय दुकान लगाने से रोककर उनकी आजीविका पर संकट खड़ा किया जाएगा तो उनके परिवारों के लिए त्योहार की खुशियां भी फीकी पड़ जाएंगी। निगम प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए, छोटे व्यापारियों को सम्मानपूर्वक व्यापार करने का अवसर दे और महापौर जनता को अपने अधूरे वादों का जवाब दें।

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