इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण, सार्वजनिक धन एवं विभागीय जवाबदेही पर उठे गंभीर प्रश्न; स्वतंत्र ऑडिट और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर वाइल्डलाइफ सीसीएफ को ज्ञापन सौंपा : नवनीत चाँद”

 

 

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने वाइल्डलाइफ सीसीएफ से की विस्तृत चर्चा; NTCA दिशा-निर्देशों, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 एवं संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक ऑडिट, श्वेतपत्र और समयबद्ध जांच की मांग।

जगदलपुर।

बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक (Wildlife CCF) से सौजन्य भेंट कर इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण व्यवस्था, सार्वजनिक धन के उपयोग, विभागीय जवाबदेही तथा संरक्षण प्रणाली की प्रभावशीलता से जुड़े विषयों पर विस्तृत एवं तथ्यात्मक चर्चा की। इस अवसर पर संगठन की ओर से एक विस्तृत ज्ञापन-मांग पत्र भी सौंपा गया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इसलिए इसके संरक्षण से जुड़ी प्रत्येक योजना, प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक सार्वजनिक व्यय संविधान एवं कानून के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित होना चाहिए।

नवनीत चाँद ने चर्चा के दौरान कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 48A एवं 51A(g), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट टाइगर, तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देश राज्य सरकार एवं वन विभाग पर वैज्ञानिक संरक्षण, प्रभावी निगरानी, एंटी-पोचिंग व्यवस्था, आवास संरक्षण तथा सार्वजनिक संसाधनों के उत्तरदायी उपयोग का स्पष्ट दायित्व निर्धारित करते हैं।

 

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में कैमरा ट्रैप नेटवर्क, ड्रोन निगरानी, डिजिटल पेट्रोलिंग, एंटी-पोचिंग कैंप, वन सुरक्षा, गश्ती दल, आधुनिक उपकरणों तथा अन्य संरक्षण गतिविधियों पर करोड़ों रुपये का सार्वजनिक व्यय किया गया है। ऐसे में जनता को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि इन निवेशों से संरक्षण व्यवस्था में क्या ठोस परिणाम प्राप्त हुए, बाघों की सुरक्षा की स्थिति में क्या सुधार हुआ और यदि अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए, तो उसके कारणों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन कब होगा।

 

प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा के दौरान यह भी उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और समाचारों में बाघों के शिकार की घटनाएँ, संरक्षण व्यवस्था की चुनौतियाँ, बाघों की संख्या को लेकर उठे प्रश्न, वर्षों से अभियोजन एवं दोषसिद्धि की सीमित प्रगति तथा संरक्षण पर हुए भारी सार्वजनिक व्यय की प्रभावशीलता को लेकर व्यापक जनचर्चा हुई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि इन तथ्यों के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया जा रहा, बल्कि इन्हीं कारणों से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि यदि विभाग द्वारा सभी कार्य नियमों एवं NTCA के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं, तो स्वतंत्र वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक ऑडिट से विभाग की विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी तथा जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।

 

प्रतिनिधिमंडल ने CCF के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं—

 

वर्ष 2018 से वर्तमान तक इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण पर हुए समस्त सार्वजनिक व्यय का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाए।

 

NTCA अथवा स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से संरक्षण व्यवस्था का तकनीकी ऑडिट एवं मूल्यांकन कराया जाए।

 

वर्ष 2018 से वर्तमान तक प्राप्त केंद्र एवं राज्य सरकार की समस्त राशि तथा मदवार व्यय का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

 

NTCA निरीक्षण रिपोर्ट, अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट तथा Management Effectiveness Evaluation (MEE) के प्रमुख निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएँ।

 

कैमरा ट्रैप, ड्रोन, डिजिटल पेट्रोलिंग, एंटी-पोचिंग कैंप, वनरक्षकों की उपलब्धता, गश्ती रिकॉर्ड एवं आधुनिक संसाधनों की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।

 

बाघ शिकार एवं वन्यजीव अपराधों से संबंधित मामलों की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कर अभियोजन एवं दोषसिद्धि की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक की जाए।

 

Tiger Recovery Action Plan को समयबद्ध रूप से प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

 

स्थानीय आदिवासी समुदायों की सहभागिता बढ़ाकर संरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

 

जांच में यदि वित्तीय, प्रशासनिक अथवा तकनीकी अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

संपूर्ण जांच एवं ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में सार्वजनिक की जाए तथा बाघ संरक्षण पर एक श्वेतपत्र (White Paper) जारी किया जाए।

 

 

चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 के अनुसार महत्वपूर्ण सार्वजनिक सूचनाओं का स्वप्रेरित प्रकटीकरण (Suo Motu Disclosure) सुशासन का अभिन्न अंग है। इसलिए सार्वजनिक धन से संचालित संरक्षण योजनाओं की जानकारी नागरिकों के समक्ष रखना लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।

 

नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा का उद्देश्य किसी अधिकारी अथवा विभाग की छवि धूमिल करना नहीं है, बल्कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व को देश के सर्वश्रेष्ठ संरक्षित टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित होते देखना है। यदि स्वतंत्र जांच एवं ऑडिट में सब कुछ नियमों के अनुरूप पाया जाता है, तो संगठन विभाग के कार्यों की सार्वजनिक सराहना करेगा; किंतु यदि कहीं कमियाँ, वित्तीय अनियमितता, तकनीकी त्रुटियाँ अथवा प्रबंधन संबंधी लापरवाही सामने आती है, तो संविधान एवं कानून के अनुसार जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है।

 

उन्होंने कहा कि बस्तर की जैव विविधता, वन और वन्यजीव किसी सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा प्राकृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण के नाम पर खर्च किया गया प्रत्येक सार्वजनिक रुपया जनता के प्रति जवाबदेह है। इसलिए पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और स्वतंत्र मूल्यांकन किसी सरकार या विभाग के विरोध का विषय नहीं, बल्कि सुशासन, विधि के शासन और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व का मूल आधार है।

 

अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार एवं संबंधित विभाग समयबद्ध, निष्पक्ष और तथ्याधारित जांच एवं ऑडिट सुनिश्चित करते हैं, तो यह केवल इंद्रावती टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक उदाहरण सिद्ध होगा।

इस दौरान जगदलपुर विधानसभा अध्यक्ष मेहताब सिंग ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप युवा अध्यक्ष सूरज कश्यप आकाश जॉन महताब सिंग, अलका नदान, किरण नाग मोटू, महेंद्र , लखमू , सुखराम मनकु गोपी उपस्थित रहे।

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