महारानी अस्पताल से उठी आवाज अब पूरे बस्तर संभाग की लड़ाई बनेगी” — आउटसोर्सिंग एजेंसियों के करोड़ों रुपये के भुगतान, श्रमिक शोषण एवं स्थानीय बेरोजगारों के साथ अन्याय की उच्च स्तरीय जांच की मांग : नवनीत चाँद

जगदलपुर, बस्तर।बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने महारानी अस्पताल, जगदलपुर में आउटसोर्सिंग एजेंसी “कॉल मी सर्विस” के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिलने, न्यूनतम वैधानिक मजदूरी से कम भुगतान, साप्ताहिक सवैतनिक अवकाश एवं ओवरटाइम का भुगतान नहीं किए जाने तथा प्रत्येक नई निविदा के बाद वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को मनमाने ढंग से हटाए जाने के गंभीर प्रकरण को बस्तर संभाग में संचालित संपूर्ण आउटसोर्सिंग व्यवस्था की गहरी प्रशासनिक एवं वित्तीय विफलता का उदाहरण बताया है।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद ने कहा कि यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर संभाग में हजारों श्रमिकों के अधिकारों, सरकारी धन की पारदर्शिता और स्थानीय बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि शासन किसी निजी मैनपावर एजेंसी को करोड़ों रुपये का भुगतान कर रहा है, तो यह सुनिश्चित करना भी शासन की संवैधानिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि कर्मचारियों को श्रम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, सवैतनिक अवकाश, निर्धारित कार्य अवधि तथा ओवरटाइम का भुगतान वास्तव में मिल रहा है या नहीं। यदि एजेंसी शासन से पूर्ण भुगतान प्राप्त कर रही है, लेकिन कर्मचारियों तक उसका लाभ नहीं पहुंच रहा है, तो यह केवल श्रमिकों का शोषण नहीं बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
नवनीत चाँद ने कहा कि आज बस्तर जिले सहित संपूर्ण बस्तर संभाग के स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, वन विभाग, आदिवासी विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विद्युत विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सिंचाई विभाग, खनिज विभाग, सार्वजनिक उपक्रमों तथा अन्य शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थानों में अनेक निजी मैनपावर एवं आउटसोर्सिंग एजेंसियां कार्यरत हैं। इन एजेंसियों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का भुगतान किया जाता है, इसलिए अब केवल एक विभाग नहीं बल्कि सभी विभागों में व्यापक जांच आवश्यक हो गई है।
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि बस्तर संभाग के सभी जिलों में कार्यरत प्रत्येक आउटसोर्सिंग एवं मैनपावर एजेंसी का तकनीकी ऑडिट, वित्तीय ऑडिट, श्रम कानून अनुपालन ऑडिट एवं सामाजिक ऑडिट कराया जाए। जांच के दौरान एजेंसियों के निविदा दस्तावेज, तकनीकी पात्रता, वित्तीय स्वीकृतियां, भुगतान आदेश, बैंक भुगतान विवरण, मस्टर रोल, उपस्थिति पंजी, वेतन पंजी, ईपीएफ एवं ईएसआई जमा करने के अभिलेख, बोनस भुगतान, ओवरटाइम रजिस्टर, अवकाश रजिस्टर तथा अनुबंध की प्रत्येक शर्त के पालन की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
नवनीत चाँद ने कहा कि जांच का एक महत्वपूर्ण विषय यह भी होना चाहिए कि वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई, उनका स्थायी निवास कहां है, क्या उनके निवास प्रमाण-पत्र एवं स्थानीयता प्रमाण-पत्र का सत्यापन किया गया है तथा स्थानीय पात्र युवाओं की उपेक्षा कर बाहरी व्यक्तियों को नियुक्त तो नहीं किया गया। अनुसूचित एवं आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर पहला अधिकार स्थानीय युवाओं, युवतियों, विधवा महिलाओं, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का होना चाहिए। यदि स्थानीय योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा कर बाहरी व्यक्तियों को रोजगार दिया गया है तो यह स्थानीय हितों के साथ अन्याय है।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रत्येक नई निविदा के बाद वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को हटाने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए। सरकार ऐसी नीति लागू करे जिसके अंतर्गत संतोषजनक सेवा देने वाले कर्मचारियों को एजेंसी बदलने या नया टेंडर होने के आधार पर रोजगार से वंचित न किया जाए और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कार्य पर बनाए रखा जाए।
नवनीत चाँद ने कहा कि यह मुद्दा केवल कर्मचारियों के वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 21 एवं 23, राज्य के नीति निदेशक तत्वों तथा Code on Wages, 2019, Code on Social Security, 2020, Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020, Industrial Relations Code, 2020 सहित अन्य श्रम कानूनों के प्रभावी पालन से जुड़ा हुआ है। यदि इन कानूनों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित एजेंसियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि बस्तर संभाग के सभी जिलों में कार्यरत समस्त मैनपावर एवं आउटसोर्सिंग एजेंसियों की जांच हेतु राज्य स्तरीय स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो वित्तीय लेन-देन, श्रम कानूनों के अनुपालन, स्थानीय एवं गैर-स्थानीय नियुक्तियों, विभागीय भुगतान, अनुबंध शर्तों तथा सार्वजनिक धन के उपयोग की व्यापक जांच कर समयबद्ध प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। जहां भी वित्तीय अनियमितता, श्रमिक शोषण, फर्जी भुगतान, दस्तावेजी हेराफेरी या नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित एजेंसी, विभागीय अधिकारी एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इस गंभीर विषय पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की जाती, तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बस्तर संभाग के सभी जिलों में चरणबद्ध जनजागरण अभियान, ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन एवं व्यापक लोकतांत्रिक जनआंदोलन प्रारंभ करेगा। यह संघर्ष केवल महारानी अस्पताल के कर्मचारियों का नहीं बल्कि बस्तर के हजारों श्रमिकों, स्थानीय बेरोजगार युवाओं और सार्वजनिक धन की पारदर्शिता का संघर्ष है।


