नारी शक्ति वंदन अधिनियम भाजपा की राजनैतिक मजबूरी – कांग्रेस

 

रायपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भाजपा की राजनैतिक मजबूरी है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने देश की लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की मजबूत नींव रखी थी। कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी महिलाओं को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध थी। कांग्रेस ने जब राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को प्रस्तुत किया था तब भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने उसका विरोध किया था। यह बिल संसद में आज भी जिंदा है, क्योंकि राज्यसभा में पारित बिल कभी समाप्त नहीं होता है।

 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि आज भाजपा की मोदी सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के बारे में सोच रही है तो इस का कारण भी कांग्रेस पार्टी के द्वारा बढ़ाया गया मजबूत कदम था। भाजपा तो आरएसएस की उस विचारधारा पोषित दल है जो महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक समझता है। आरएसएस के संगठन में महिलाओं को वर्षों तक स्थान नहीं दिया गया, आज भी आरएसएस के प्रमुख पदो तक महिला नहीं पहुंच पाती है।

 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगरपालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं।

 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस का शुरू से मानना रहा है कि आधी आबादी को उनका पूरा हक मिलना ही चाहिए। महिलाओं को देश की संसद और राज्यों के विधानमंडलों में आरक्षण की कांग्रेस शुरू से हिमायती रही है। कांग्रेस ने अपनी कार्यसमिति में भी महिला आरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित किया है।

 

 

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