प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना का विद्युत् कंपनी कर रहा बंटाधार,बन रही पलायन की स्थिती।

 

मेघा तिवारी की रिपोर्ट

कोरबा(छत्तीसगढ़) l प्रदेश सहित देश के कई राज्यों को रौशन करने के लिए विख्यात कोरबा जिले में स्थित राज्य विद्युत कंपनी की नई कार्यप्रणाली पर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।

सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के एचटीपीपी,कोरबा पूर्व,डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी बाजपेई ताप विद्युत संयंत्र मड़वा में कार्यरत ठेकेदारों के मध्य अब खुद के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता आन पड़ी है।

दरअसल एचटीपीपी,कोरबा पूर्व, डीएसपीएम, और मड़वा संयंत्र के संगठित कांट्रेक्टर एसोसिएशन द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में कॉन्ट्रैक्टर एशोसिऐसन के अध्यक्ष धनंजय सिंह समेत एसोशिएशन के पदाधिकारी पत्रकारों से रूबरू हुए इस दौरान वर्तमान में ठेकेदारों की समस्या को सामने रखते हुए कहा कि राज्य विद्युत कंपनी द्वारा अब बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 5 से 10 करोड़ की बड़ी-बड़ी निविदा जारी की जा रही है।जिसका सीधा असर स्थानीय ठेकेदारों को और उनके यहां कार्यरत लगभग 5000 ठेका श्रमिकों पर पड़ेगा।

वही बड़ी कंपनियां अपने साथ बाहरी मजदूरों लेकर आएंगे जिससे स्थानीय श्रमिकों के साथ छलावा होना संभव है ।ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब कोरबा जिला जो सबसे अधिक रोजगार देता था वहां से सर्वाधिक पलायन का रिकॉर्ड भी बन जाए।

हालांकि उद्योग मंत्री द्वारा इस समस्या के निदान को लेकर ठेकेदारों को आश्वस्त किया है।लेकिन विद्युत कंपनी के जवाबदार अधिकारी फिलहाल इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।

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