बस्तर की खनिज संपदा पर पहला अधिकार बस्तरवासियों का – फर्जी ग्रामसभा के आधार पर खनन मंजूर नहीं- नवनीत चांद

कलेक्टर दंतेवाड़ा को ज्ञापन दे, संपूर्ण मामले के निष्पक्ष जांच और कार्यवाही की रखी मांग
जल जंगल जमीन बचाने मुक्ति मोर्चा जनता कांग्रेस ने बुलंद की आवाज
मोर्चा के मुख्य संयोजक, जिलाध्यक्ष दंतेवाड़ा संभागीय महामंत्री ने जारी की संयुक्त बयान
दंतेवाड़ा, गत दिवस
बैलाडीला (दक्षिण बस्तर) के डिपॉजिट-4 खनन परियोजना को लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने कड़ा विरोध दर्ज करते हुए संबंधित प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
इस विषय में मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस ने स्पष्ट कहा है कि यह केवल एक खनन परियोजना नहीं, बल्कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा का प्रश्न है
जारी विज्ञप्ति में अपने आरोप में उन्होंने कहा है कि इस विषय इस विषय में
ग्रामसभा की प्रक्रिया फर्जी एवं संदिग्ध है। मुक्ति मोर्चा एवं पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा
की वास्तविक सहमति के बिना खनन को 8 दी गई
दस्तावेजों में संदिग्ध हस्ताक्षर पाए गए।
संवैधानिक प्रावधानों (पेसा, FRA) का उल्लंघन किया गया।यह सीधे तौर पर अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की सर्वोच्चता को चुनौती देने जैसा है। “जल, जंगल, जमीन” पर अधिकार का सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि—
बस्तर की भूमि केवल खनिज भंडार नहीं हैयह आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और जीवन का आधार है।
संविधान की पाँचवीं अनुसूची
पेसा अधिनियम, 1996
वन अधिकार अधिनियम, 2006
स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करते हैं
कि बिना ग्रामसभा की वास्तविक सहमति के कोई भी परियोजना वैध नहीं हो सकती। जल जंगल जमीन बचाने को लेकर संवैधानिक चेतावनी मैं मोर्चा ने बिंदुवार अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि
यदि ग्रामसभा की सहमति फर्जी या जबरन ली गई है, तो ऐसी स्वीकृति कानूनी रूप से शून्य (Void) मानी जाएगी।
यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि
आदिवासी स्वशासनप्राकृतिक न्याये लोकतांत्रिक अधिकार
तीनों के खिलाफ है।
जारी मुख्य मांगों को रखते
हुए कहा है कि मुख्य मांगें
डिपॉजिट-4 परियोजना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच
जांच पूर्ण होने तक खनन प्रक्रिया पर तत्काल रोक
ग्रामसभा प्रक्रिया की पुनः पारदर्शी
दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई
संघर्ष का ऐलान
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
👉 यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई,
तो संगठन द्वारा “जल, जंगल, जमीन बचाओ आंदोलन” प्रारंभ किया जाएगा।
👉 यह संघर्ष केवल एक खदान के खिलाफ नहीं होगा,
बल्कि बस्तर के अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन होगा।
👉 ग्रामसभा, संविधान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए
हर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यम का उपयोग किया जाएगा।
🧭 राजनीतिक संदेश
“बस्तर का फैसला बस्तर की जनता करेगी,
न कि फर्जी कागजों और बंद कमरों में बैठे लोग।”
इस दौरान बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के पदाधिकारी के रूप में बस्तर संभाग अध्यक्ष एवं मोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चाँद, संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी, दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रेमन मरकामी, हिड़मा पोडियाम, खुर्शुराम मौर्य, रमेश मांडवी, संतोष सिंह, साइबो सोढ़ी, चैतराम सोढ़ी, हुरा कुंजाम, कन्हैया लाल यादव, जयपाल यादव, बबलू कार्ति, प्रिया तामों , शांति मांडवी, शांति सोढ़ी, लक्ष्मी कवासी, आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे!



