इबादतों की रात (सब-ए-बारात) मुबारक हो

शब-ए-बरात यानी गुनाहों से माफी की रात। रमजान के मुकद्दस महीने से ठीक दो सप्ताह पहले की इस रात को अजीम रात में शुमार किया जाता है। इस पूरी रात में इबादत का काफी सवाब मिलता है। दुनिया से रुख्सत हो चुके अपने बुजुर्गों की याद में उनकी बख्शिश की दुआएं मांगी जाती हैं।

गुजरे साल कोरोना संक्रमण की वजह कर शब-ए-बरात पर लोग घरों में ही कैद रह गए थे। इस बार हालांकि प्रशासन ने घर से बाहर निकलने पर पाबंदी तो नहीं लगाई है, लेकिन भीड़ से परहेज करने को कहा है। लेकिन इस बार चूंकि मनाही नहीं है तो लोग इस रात में इबादत के लिए तैयारी कर रहे हैं। लोग न सिर्फ घरों में रह कर इबादत करेंगे, बल्कि मस्जिदों में भी नमाज और तिलावत करेंगे। कब्रिस्तानों में जाकर वहां अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर उनकी निजात की दुआएं मांगेंगे। जिला काजी मौलाना अहमद सईद ने कहा कि इस मुकद्दस रात में पूरी रात इबादत करने का बहुत सवाब है। लोग इसका फायदा उठाएं। उन्होंने कहा कि कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए कहीं भी भीड़ लगाने से परहेज करें।

Related Articles

Back to top button