लाल चर्च:समूचे देश में एकता ,अखंडता ,अमन शांति के लिए प्रार्थना के साथ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ क्रिसमस पर्व


खेल, विशेष मंचन , आतिशबाजी जैसे विविध आयोजनों के साथ सबसे पुराने लाल चर्च में मनाया गया प्रभु यीशु का जन्मदिवस
जगदलपुर,नवीन श्रीवास्तव।दिसंबर का महीना मसीह विश्वासियों के लिए एक बडा महापर्व माना जाता है दिसंबर सप्ताह के पहले रविवार को आगमन को पहला रविवार मानकर चर्च में नीली मोमबत्तियां पूरे 4 हफ्ते तक जलाई जाती है। पूरे दिसंबर गरिमा एवं सफलता पूर्वक विभिन्न कार्यक्रमो की आयोजन को लेकर रचनात्मक तैयारियां भी की जाती है इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रत्नेश बेंजामिन ने बताया कि इस वर्ष विभिन्न चर्चो की समितियां के द्वारा खेलकूद का भी आयोजन किया गया वहीं प्रभु के जन्म का शुभ समाचार देने के लिए विभिन्न चर्चो के द्वारा केरोल टीम बनाई गई थी , केरोल टीम द्वारा अपने चर्च के मसीह सदस्यों के यहां जाकर प्रभु के जन्म का समाचार के साथ लोगों को क्रिसमस एवं नूतन वर्ष की शुभकामनाएं प्रदान की गई। उन्होंने आगे बताया कि गत 24 दिसंबर की रात को शहर के विभिन्न चर्चो में ज्योति आराधना संपन्न की गई जिसमें यीशु मसीह के बैतलहम नगर के गौशाले में जन्म लेने की दृश्य को भाव पूर्ण ढंग से दृश्यंकित किया गया जिसमें अद्भुत तारे का भी उसमें वर्णन किया गया ।
वर्णन में ज्योतिषियों के साथ सराय, गौशाला में जन्म लेने वाले यीशु मसीह भी वर्णन किया गया ।
विविध कार्यक्रमों की बीच लाल चर्च में भी फायर शो का आयोजन सोशल कमेटी के अध्यक्ष मनीष सीरिल एवं सदस्यों के द्वारा आयोजित किया गया जिसके अंतर्गत रंग बिरंगे फ़्तखलाल चर्च के ऊपर से छोड़े गए और शानदार आतिशबाजी की गई ।
श्री बेंजामिन ने बताया कि सुबह 9:00 बजे क्रिसमस की आराधना प्रारंभ की गई थी आराधना में विभिन्न चर्चो के पास्टरगणों द्वारा आराधना का संचालन कर समूचे देश के साथ छत्तीसगढ़ के लिए एवं बस्तर की शांति व अमन चैन के लिए विशेष आराधना की गई।
उल्लेखनीय है कि शहर के सबसे पुराने लाल चर्च में क्रिसमस अवसर पर 25 दिसंबर सुबह रेव.लॉरेंस दास के द्वारा आराधना का संचालन एवं उपदेश बिशप एस सुना के द्वारा दिया गया जिसमें खास तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य सहित बस्तर के अमन चैन के लिए प्रार्थना की गई पश्चात चर्च में ही क्रिसमस केक काटा एवं उसका वितरण सभी उपस्थित सदस्य, श्रद्धालुओं के बीच किया गया।
बाहर से आए क्वायर के द्वारा क्रिसमस के उपलक्ष में विशेष गीत गाए गए साथ-साथ लोकल प्रिचरों के द्वारा भी विशेष गीत गाए गए अर्पण की विधि भी अपनाई गई इस तरह से क्रिसमस की आराधना भली-भांति शांतिपूर्वक संपन्न की गई।



