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वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने के लिए 1.95 लाख लोगों ने की मांग, 25000 का निपटारा

चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि बिहार की मसौदा मतदाता सूची में नाम शामिल करने और हटाने के लिए अब तक 1.95 लाख से ज्यादा लोगों ने आवेदन किए हैं, जिनमें से लगभग 25,000 का निपटारा कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि दावों और आपत्तियों के तहत 1,95,802 आवेदनों में से कितने मतदाता सूची में नाम शामिल करने और इनमें से कितनी नाम हटाने के लिए थे।

 

भाकपा (माले)-लिबरेशन ने 79 और राजद ने 3 आवेदन दिए। ये दोनों बिहार में मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय दल हैं। भाजपा और कांग्रेस समेत किसी भी राष्ट्रीय दल ने अभी तक कोई दावा और आपत्तियां नहीं की हैं, जबकि प्रक्रिया के लिए अभी चार दिन और बचे हैं।

 

 

एक अधिकारी ने बताया, दायर की गई आपत्तियां विभिन्न कारणों से मसौदा सूची से हटाए गए 60 लाख से जयादा नामों की तुलना में नगण्य हैं। चुनाव प्राधिकरण ने सोमवार को कहा था कि मसौदा सूची के अनुसार, 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11 प्रतिशत के दस्तावेज अब तक प्राप्त हो चुके हैं

 

1 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। जो बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का हिस्सा है। आयोग ने रविवार को यह रेखांकित किया था कि दावे और आपत्तियों की अवधि मतदाताओं को न केवल मसौदा सूची में हुई गलतियों को सुधारने का अवसर देती है, बल्कि उन्हें आवश्यक दस्तावेज जमा करने का भी मौका प्रदान करती है, जो उन्होंने गणना फॉर्म भरते समय उपलब्ध नहीं कराए थे।

 

24 जून से 24 अगस्त तक 60 दिनों में 98.2 प्रतिशत लोगों ने अपने दस्तावेज जमा कर दिए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह मतदाता सूची में नाम जोड़ने के इच्छुक लोगों से आधार या 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से किसी को भी स्वीकार करे।

 

 

 

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