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बस्तर के जनजीवन और विकास के प्रति दायित्व को लेकर एनएमडीसी को रवैया सुधारना होगा – नवनीत चांद

 

जगदलपुर।बस्तर के प्रति दायित्व और हित को एनएमडीसी द्वारा जिस तरह से उदासीनता बरती जा रही है और जिस तरह से बस्तर की जनता को नजरअंदाज किया जा रहा है उसे लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा मोर्चा संयोजक नवनीत चांद के नेतृत्व में लगातार आवाज उठाती आ रही है । इस विषय में मोर्चा के प्रमुख नेता चांद द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि बस्तर एवं बस्तर के जन जीवन को लेकर एनएमडीसी का रवैया,बस्तर के हित,विकास को लेकर उनके कथनी करनी का भेद बस्तर के बेरोजगारों की आवाज को अनसुना करने के बाद जिस तरह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है इसी तरह नीचे दिए गए उक्त प्लांट के खामियों , कमियों को आम जनता एक बार देख व जान भी ले तो सब पानी की तरह साफ हो जाता है । नवनीत ने आगे प्लांट के खामियों को निम्नलिखित रुप से सामने रखते कहा है कि समय रहते एनएमडीसी को बस्तर के प्रति अपने दायित्व को लेकर जागना ही पड़ेगा।

नगरनार स्टील प्लांट के निम्नलिखित रवैए और खामियों से बस्तर एवं बस्तर के जनता व विकास के प्रति उदासीनता को समझा जा सकता है :-

0 नगरनार स्टील प्लांट के कमर्शियल गेट की तकनिकी खामी एवं अन्य गेट की कमी, सीआईएसएफ की अति जटिल पास प्रक्रिया एवं, अमानवीय व्यवहार से, बस्तर का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय की परेशानियां कैसे और क्यों ना बढ़ेगी..व्यवसाई क्योंकर दुखी नहीं होगा?

0 बस्तर सहित देश के अन्य राज्यों मे प्लांट से व्यावसायिक रूप से जुड़ने वाले व्यापारी एवं ट्रांसपोर्ट जगत, प्लांट के कमर्शियल गेट की जटिलता के चलते बस्तर के एक मात्र प्लांट का नाम हो रहा है खराब,क्या यह विचारणीय और गंभीर बात नहीं है?

0 यह भी समस्या प्लांट का आंतरिक सॉफ्टवेयर जिससे प्लांट के व्यवसायिक बिलिंग एवं धर्म कांटा संचालित होते हैं और लगातार तकनीकी रूप से खराब होने के चलते, प्लांट में कच्चा माल और फाइनल प्रोडक्ट ट्रांसपोर्ट करने में दिक्कत का सामना प्लांट को रोज करना होता है!

0 एनएमडीसी प्रबंधन ने नगरनार स्टील प्लांट के डिजाइन का निविदा में मेंकोन कंपनी को दिया था कंपनी के द्वारा 30 मिलियन टन उत्पादन की क्षमता वाले प्लांट में एक ही कमर्शियल गेट देना व्यवसायिक दृष्टिकोण से सबसे बड़ा परेशानी का सबब बना ?

0 प्लांट में क्षमता से कम सीआईएसएफ जवानों की तैनाती- प्लांट प्रबंधन एवं संचालन के लिए यह भी सबसे बड़ी परेशानी का सबब साबित हो रहा? तो वही सीआईएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का प्लांट के नक्शे को देखने एवं व्यापक स्तर पर खामियां होने के बाद भी, खामियों को दुरस्त बिना करवाए सीआईएसफ सुरक्षा को अप्रूवल देना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है!

0 प्लांट का उद्देश्य व्यावसायिक दृष्टिकोण से रेलवे एवं सड़क परिवहन हेतु ज्यादा से ज्यादा मौके प्रदाय कर स्थानीय स्तर पर व्यवसाय से लोगों को जोड़ना था! 9000 टन कोइल, 5000टन से अधिक महीने मे पिग आयरन उत्पादन कर ट्रांसपोर्ट करने का लक्ष्य,परंतु वह उद्देश्य वर्तमान परिवेश में प्लांट प्रबंधन की अकुशलता के चलते संभव नहीं हो पा रहा है !

वहीं प्लांट के गेट को ऑपरेट करने का प्लान अन्य स्टील प्लांट से ज्यादा जटिल बना दिए गए हैं ? जो स्थानीय स्तर पर ट्रांसपोर्ट के माध्यम से व्यवसाय करने वाले व्यापारियों एवं प्लांट से उत्पादन माल खरीदने वाले व्यापारियों के लिए सर दर्द बना हुआ है इससे न केवल प्लांट बल्कि संपूर्ण बस्तर की छवि राज्य सहित देश में खराब हो रही है! और यह बस्तर वास बर्दाश्त नहीं करेगा, यदि समस्या के ध्यान आकर्षण के बाद भी प्लांट एवं एनएमडीसी प्रबंधन बस्तर के व्यापारी हित को ध्यान में रखते हुए इन समस्याओं का समाधान नहीं करता है! तो आगामी दिनों में बस्तर के सभी ट्रांसपोर्ट व्यपारियों एवं प्लांट हितैषी बुद्धिजीवियों को को संग्रहित कर, प्लांट के कमर्शियल गेट के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा!

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