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भाजपा के सांसद, मंत्री ही खोल रहे सुशासन तिहार की पोल : विनोद चंद्राकर

 

 

 

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छ.ग. शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने प्रदेश सरकार द्वारा मनाए जा रहे सुशासन तिहार को आम जनता के साथ मजाक सरकार कर रही है श्री चंद्राकर ने कहा कि एक तरफ साय सरकार सुशासन तिहार मनाने का ढकोसला कर रही है। वहीं, दूसरी ओर समाधान ​शिविरों में उन्हीं के सांसद, मंत्री सवाल उठा रहे हैं। श्री चंद्राकर ने कहा कि सुशासन तिहार की सफलता प्रशासनिक कसावट पर निर्भर करता है। लेकिन, सरकार की प्रशासनिक पकड़ अत्यंत कमजोर होने के कारण अ​धिकारी-कर्मचारी की मनमानी के चलते उनके सारे कार्यक्रम विफल हो रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि प्रदेश में आज चहँूओर नाैकरशाही हावी है। सत्ता पक्ष के नेताओं से मिलीभगत कर प्रशासनिक अ​धिकारी-कर्मचारी खुलेआम भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। कई विभाग ऐसे हैं, जिनके प्रमुख अ​धिकारियों द्वारा सर्वोच्च सदन विधानसभा में भी भ्रामक जानकारी दे रहे हैं। इन अ​धिकारियों पर कार्रवाई ना कर सरकार उनके भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का काम कर रहा है।

श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि कल सुशासन तिहार के तीसरे चरण में समाधान ​शिविर के दाैरान बसना ब्लाॅक के ग्राम गनेकेरा में आयोजित कार्यक्रम में महासमुंद सांसद ने बड़ी बातें कही। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुशासन तिहार में मिले आवेदनों के शत-प्रतिशत निराकरण पर शंका व्यक्त किया था। सांसद द्वारा यह कहना कि प्रशास​न उन्हें शत्-प्रतिशत आवेदनों का निराकरण होना बता रहे हैं, जबकि, सच्चाई अलग है। सांसद ने कहा कि जहां भी वे जाते हैं, उन्हें ऐसी ​शिकायतें मिलती है, जिसका समाधान होना सुशासन तिहार के ​शिविर में अ​धिकारियों द्वारा बताया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि प्रशासनिक अमला झूठे आंकड़े बताकर वाहवाही लूटने का काम कर रहे हैं। पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि साय सरकार के सुशासन​ तिहार की पोल पूर्व मंत्री तथा वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी खोल कर रख दी है। केंद्र व राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी ​शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, भ्रष्टाचार, पुलिस विभाग में बल की कमी, प्रदेश में बढ़ती महंगाई को लेकर पूर्व मंत्री द्वारा लगातार पत्र लिखा जा रहा है। जिससे यह स्पष्ट परिल​क्षित हो रहा है कि सरकार सुशासन तिहार के नाम केवल प​ब्लिसिटी स्टंट कर रहा है। इसका कोई फायदा नहीं होने वाला। स्वास्थ्य विभाग में मरीजों का उपचार, आवश्यक दवाइयों की कमी, गरीब मरीजों को इलाज नहीं मिलने से निजी अस्पतालों में कर्ज लेकर उपचार, ​शिक्षा विभाग में ​शिक्षकों की कमी, 33 हजार ​शिक्षकों की भर्ती की घोषणा पर विचार नहीं करना, पुलिस विभाग में बल की कमी से प्रदेश में बढ़ते अपराध की ग्राफ को लेकर पूर्व मंत्री व सांसद श्री अग्रवाल ने अपने ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

श्री चंद्राकर ने कहा कि उनके द्वारा पूर्व में लगातार कृ​​षि विभाग के बड़े अ​धिकारियों द्वारा की गई भ्रष्टाचार की ​शिकायत प्रमुख सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त, छत्तीसगढ़ शासन एवं कलेक्टर महासमुंद से की गई थी। विधानसभा में गलत जानकारी विभाग के अ​धिकारी द्वारा दी गई, जिसकी दस्तावेजों के साथ ​शिकायत हुई। लेकिन, दागी अफसर को ही जाँच टीम में शामिल कर दिया गया। तथा जाँच के नाम पर खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। इस मामले में भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक शून्यता व सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है। इस मामले में किसानों के साथ विभाग द्वारा घोर अन्याय किया गया। संचालक कृषि विभाग के आदेशों को धता बताकर उप संचालक द्वारा मनमाने तरीके से नियम प्रक्रिया को दरकिनार करते हुये चहेते ठेकेदारों से सामग्री क्रय की गई। जो किसानों के उपयोग के थे ही नहीं। क्रय सामग्रियों का वितरण भी नहीं किया गया। आत्मा योजना के तहत भी भारी भ्रष्टाचार किया गया। कमीशन के लिए नियम विरूद्ध खरीदी की गई। जो अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है भ्रष्टाचार निडरता से ​िवभाग ​व्याप्त है कि घूस की रकम ऑनलाइन खुद के बैंक खाते जमा करा रहे हैं। समस्त सबूतों के साथ कलेक्टर को शिकायत की गयी कलेक्टर ने उन्ही को जांच का भार सौंप दिया। जिले में नित नए जमीन घोटाले, कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से जमीन खरीदी-बिक्री की शिकायते मिल रही है। जिला प्रसासन मौन है, जो गंभीर सवाल है। यह किसके इशारे से की गई आैर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। श्री चंद्राकर ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त प्रशासनिक तंत्र को बिना सुधारे सुशासन की परिकल्पना नहीं की जा सकती। यह सरकार केवल सुशासन की ढोल पीटने में व्यस्त है, जबकि वास्तविकता कुछ ही है।

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