किश्तों में कंबल… पीठ पर बस्ते रख दौड़ रहे देखो बच्चे। अब देश में नई रोशनी से सुबह होगी।।

धार..एक अभियान/नवीन श्रीवास्तव

अकेले सुख का क्या करोगे…आनेवाले कल के डर से अपने लिए और अपने बच्चों के साथ..पीढ़ियों के लिए जो दूसरे के हिस्से की सुख..चैन.अधिकार..शांति लूट कर अपनी पेटी में… टेटी में छुपा..छुपा कर रखने वालों..निकालो..इसे देखना देश में आत्मीयता की गर्माहट ठंड को कैसे उठा कर पटकती है..बाजारू तिलस्म को तोड़ दो..जिसके चलते घर,घर से आंगन.. आंगन से पेड़.. और पेड़ जैसी ममतामयी और तों को गायब कर रही..बचपन से बच्चों को ..लल्ला लल्ला लोरी..दारू का कटोरी सीखा कर उन्हें कमजोर करने वाले समस्त कारणों की अंगीठियां जलाओ..महत्व आकांक्षाओ के सियासी खेल .के साथ आत्ममुग्धता के आईने की जरूरत नहीं ।देश में बच्चों और स्त्रियों पर बहुत काम करने हैं.. समय बीत रहा..जश्न के बाजार का कोई मतलब नहीं..ऐसे बाजार की क्या जरूरत जहाँ से कोई सुख खरीद सकता है..तो कोई नहीं ।बन्द करतें हैं इसे और..अपनों के लिए सुख,शांति ,ऊर्जा..शक्ति के लिए नया बाजार खोलते हैं ..सब सम्भव है..बस देश के महान गौरवशाली..उपलब्धियों पर विचार करो.प्रेम की ऐसी सृजन भरी शक्ति नामर्दो के पास नहीं होती..अपनी और राष्ट्र के ताकतों को सोच कर देखेंगे.. तो ठंड कैसी और कितनी हो..शरीर नई गर्मी जाग उठेगी ….दर असल हमारे देश के डीएनए में विस्फोटक शक्तियां है ..अब जाग जाइए सु प्रभात🙏🙏🙏(जारी..फिर मिलता हूं)
सदैव आपका..नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,जगदलपुर



