तेलंगाना के सीएम का एलान, भाजपा ने नहीं खोले अभी अपने पत्ते

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी की राज्य के इकाई के अध्यक्ष अनुमूला रेवंत रेड्डी राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस आलाकमान ने रंवत रेड्डी को मंगलवार को विधायक दल का नेता बनाने के फैसले पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बताया गया कि शपथ ग्रहण समारोह सात दिसंबर को होगा।
तेलंगाना के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे
रेवंत रेड्डी तेलंगाना के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। करीब एक दशक पहले तेलंगाना के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आने से लेकर अब तक भारत राष्ट्र समिति के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री थे। पार्टी नेतृत्व के फैसले के बाद रेवंत रेड्डी ने मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत सभी लोगों का आभार जताया।
उत्तम कुमार रेड्डी ने भी पेश की थी दावेदारी
इससे पहले कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के पूर्व अध्यक्ष और विधायक एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा था कि वह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। हालांकि, जब कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रेवंत रेड्डी के नाम की घोषणा की तो उनके साथ उत्तम कुमार रेड्डी भी मौजूद थे। वेणुगोपाल ने कहा कि विधायक दल के नेता का फैसला करने के लिए कल कांग्रेस विधायक दल की बैठक हैदराबाद में बैठक हुई थी। उस बैठक में पर्यवेक्षक मौजूद थे। विधायक दल ने एक प्रस्ताव पारित कर विधायक दल का नेता चुनने का जिम्मा कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपा था। इसके बाद आज प्रदेश प्रभारी माणिक राव ठाकरे और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और पर्यवेक्षक डीके शिवकुमार ने खरगे को रिपोर्ट सौंपी।
रेवंत रेड्डी का सफर
कांग्रेस के दिग्गज नेता जयपाल रेड्डी के दामाद रेवंत रेड्डी ने लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मलकाजगिरी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने टीआरएस प्रत्याशी मर्री राजशेखर रेड्डी को हराया था। अब विधानसभा चुनाव 2023 में कोडांगल और कामारेड्डी विधानसभा सीटों से उन्होंने चुनाव लड़ा। रेवंत रेड्डी कोडांगल से तो जीत गए, लेकिन कामारेड्डी सीट से हार गए।
ऐसे रहे थे चुनाव परिणाम
इससे पहले तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए गए थे। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। पार्टी ने के. चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) हैट्रिक के सपने को चकनाचूर कर दिया था। कांग्रेस ने 64 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं बीआरएस 39 सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी। आठ सीटों पर भाजपा और छह सीटों पर एआईएमआईएम ने जीत दर्ज की थी। एक सीट पर भाकपा ने जीत हासिल की थी। राज्य की 119 सीटों वाली विधानसभा के लिए 30 नवंबर को मतदान हुआ था।
तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीतकर आई भाजपा की ओर से अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को संबंधित राज्यों के अध्यक्षों से इस संबंध में चर्चा की है।
जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जीतकर आए अपने वफादार विधायकों से लगातार मिल रही हैं, जबकि भोपाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि वह पहले भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल नहीं थे और आज भी नहीं हैं।
इस चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन का कारण अनेक लोग मुख्यमंत्री के तौर पर चौहान द्वारा लागू की गई लाडली बहना योजना को बता रहे हैं। शिवराज ने कहा कि वह कल छिंदवाड़ा जा रहे हैं, जहां की सात में से एक सीट पर भी पार्टी को जीत नहीं मिली है।
उन्होंने संकल्प लिया है कि भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 29 सीटें जीते और नरेद्र मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री बनें। वर्ष 2019 में छिंदवाड़ा से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ जीते थे। राज्य में यही एक ऐसी सीट थी, जो भाजपा हारी थी।
दूसरी ओर, जयपुर में आयोजित बैठक में प्रदेश कांग्रेस ने विपक्ष के नेता का चयन करने की जिम्मेदारी केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी है। बैठक के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि यह पद किसी युवा नेता को दिया जाना चाहिए, ताकि हम पार्टी की युवा ब्रिगेड को भरोसे में ले सकें। सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश में कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से इस्तीफा मांग लिया है।
उधर, राजस्थान में वसुंधरा खेमे के सूत्रों ने बताया कि भाजपा के कम से कम 50 विधायकों ने सोमवार तक वसुंधरा राजे से उनके आवास पर मुलाकात की है, जबकि प्रदेश इकाई के प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर पार्टी संसदीय बोर्ड ही फैसला लेगा।



