ना सत्ता में ना विपक्ष में पर जनता के पक्ष में ,बस्तर में मुक्ति मोर्चा के बढ़ते कदम … बनते मुकाम

बस्तर में राजनीति को लेकर युवाओं की रुझान बढ़ी.. नवनीत ने दिया सन्देश खुद से जुड़ी नकारात्मक धारणाओं को बदलें

जगदलपुर(बस्तर):एक समीक्षा/वरिष्ठ पत्रकार नवीन श्रीवास्तव

शहर में एक युवा नेता का पोस्टर चर्चे में है ..join जोगी पार्टी,join मुक्तिमोर्चा,joinनवनीत..एक नजर में तो इन पोस्टरों में सहज भरोसे का आमंत्रण साफ दिखता । इस पोस्टर को लेकर खुद पोस्टर में मौजूद जनता कांग्रेस के युवा नेता एवं बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चांद का कहना है कि — यह विश्वास और हौसले का ही आमंत्रण है ..बस्तर की आम जनता से बस्तर के युवा पीढ़ी से की वे उठे ..और हमारे साथ आयें.. बस्तर हित के लिए हम मिलकर लडेंगे.. पोस्टर से कोई जंग जीती नहीं जा सकती .पर इरादे मजबूत हो तो कुछ भी किया जा सकता है । नवनीत आगे कहते है कि — जनता की आवाज बनने या दिलो में जगह बनाने जरूरी नहीं है कि आप सत्ता में हों या फिर विपक्ष में.. इतना जरूर है आपको जनता के पक्ष में जनता के साथ रहना पड़ता है

लाल चर्च चौक   मुख्य मार्ग  के साथ चांदनी चौक और अन्य जगह पर टंगे इन पोस्टरों में  मुख्य भूमिका में दिख रहे युवा नेता नवनीत चांद की बात करें  तो उन्होंने बस्तर के परिदृश्य में जिस तरह से अपनी  कुछ वर्षों में पहचान बनाई है वह खुद उनके लिए किसी प्रयोग की तरह ही है हालाँकि वे वर्षों से राजनीति और सार्वजनिक छेत्र में सक्रिय हैं परंतु अब एक नएपन के साथ  उनके पीछे बढ़ता कारवाँ बता रहा कि उनकी मौजूदगी का वजन भी  बढ़ा  है  । योजनाबध्द ढंग से लगातार *परिश्रम ने नवनीत के साथ मुक्तिमोर्चा को भी जहां खड़ा कर दिया है  वहीँ जनता कांग्रेस नेता के रूप में उन्होंने पार्टी को भी रिफ्रेश किया है  और उम्मीदें भी इसमें कोई दोमत नहीं..उन्होंने बस्तर के मुद्दों को जहाँ मुखर किया वही एक पीढ़ी में राजनीति के प्रति राजनीतिक रुझान जगाते भी दिख रहे* ..।

दरअसल बस्तर में तमाम संगठन व राजनीतिक पार्टियों के बीच बस्तर जनता कांग्रेस के युवा नेता के रूप में एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चांद जिस तरह लीक से हटकर अपने प्रति लोगो की नकारात्मक नजरिये को बदलने के चुनौती पर काम कर आगे बढ़ते दिख रहे आमतौर पर वह दिखता नही है खासकर राजनीति में .. सम्भव है युवा पीढ़ी में कुछ अब उनका अनुकरण करें.. बहरहाल तेजतर्रार कार्यशैली के साथ किसी भी कार्य को योजनाबध्द ढंग से अंजाम देने वाले नवनीत वे शख्श है जो बस्तर के युवा नेताओं के बीच अपने लिए हॉट सीट सुरक्षित रखते है.. 2019 में कोरोना के गम्भीर संक्रमण के समय आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प लिए नवनीत ने कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए चंद युवाओं के साथ उस समय जरूरतमंद लोगों के लिए काम करना शुरू किया था..फिर इस संघर्ष से हौसला बढ़ा.. फिर हौसला से इरादें मजबूत हुए और फिर श्री
चांद के नेतृत्व में बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने स्वरुप लिया.. यह वही समय था जब संक्रमण के कठिन समय मे आम जनता को अपने बीच ऐसे सहज और आसानी से उपलब्ध दमदार व्यक्ति की जरूरत था जो उनकी आवाज बन उनकी समस्याओं को व्यवस्था तंत्र तक पहुंचा सके ..परिस्थितियों को देख अनुभवी नवनीत ने इस तरह आम बस्तरवासियों के उम्मीदों पर खुद को खरे साबित करने के रास्ते पर कदम बढ़ाया ..पुराना अनुभव,बेबाकी और होमवर्क उनका काम आया बस्तरअधिकार मुक्तिमोर्चा संगठन माध्यम बना ..शहर के साथ गांव- गांव खेत खार खलिहान पगडंडियों तक पहुँचने का मुक्तिमोर्चा ..के रूप में मानो बस्तर के उन लोगो को अपना एक नेता मिल गया .. भले वे ना चुने हुए जनप्रतिनिधि थे ना किसी सत्ता या विपक्ष के परन्तु अब वे निरन्तर लोगो की बातों को उठाने मजबूत विकल्प के रूप में सामने उभर कर आये हैं और उनके पीछे बढ़ता कारवां भी बहुत कुछ कह रहा है.. जनता से व्यवस्था के प्रति जिम्मेदार लोगों की दूरियों से कई बार इस तरह के समीकरण बनते हैं कि इसका फायदा और …किसी को हो जाता है ..सड़क- सड़क, गांव गांव ..मुक्ति मोर्चा का बैनर लेकर लोगों का दुख सुख बांटने पहुंचते नवनीत को इसका भी फायदा हुआ इस तरह की मुक्तिमोर्चा की जमीन मजबूत होती चली गई इस तरह देखा जाए तो मुक्ति मोर्चा संयोजक एवं बस्तर के युवा नेता के रूप में चर्चित चेहरे लिए नवनीत चांद एक महत्वपूर्ण संदेश देने भी कामयाब रहें कि – प्रासंगिक रहने के लिए सत्ता या विपक्ष में रहना जरूरी नही..पर जनता के करीब और जनता से जुड़े मुद्दों के पक्ष में रहना जरुरी है .. जनता ,प्रशासन और राजनीति के बीच संतुलन के साथ बस्तर में किसान,मजदूर,महिलाओं,छात्र छात्राओं, बेरोजगारों,संविदाकर्मियों आदिवासियों के साथ आम जनता की आवाज बन निरंतर अपनी मजबूत जमीन बनाने अभी तक कामयाबी हासिल करने सफल रहे है ..यह किसी चुनौती से कम नहीं अगर इसी तरह वे चलते रहे तो ना केवल बस्तर में मुक्तिमोर्चा संगठन की अपनी समीकरण होगा वही राजनीतिक मुद्दों के साथ बस्तर में उन्हें नजरअंदाज करना उनके लिए भी मुश्किल साबित हो सकता है जो शुरुवाती दौर में उन्हें देख कंधे उचका लेते ..थे. ।.

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