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महाकाल के सवारी मार्ग पर जायजा लेने पहुंचे अधिकारी।

उज्जैन । राजाधिराज महाकाल की प्रथम सवारी निकलने में अब सिर्फ चार दिन शेष बचे हैं। बावजूद व्यवस्था और आवश्यकता के बीच बड़ा फर्क नजर आता है। सवारी मार्ग पर मुश्किलें दिखाई पड़ती हैं। जर्जर मकान, अधूरा सड़क निर्माण और बैरिकेंडिंग की ऊंचाई परेशानी का सबब बनेगी। बुधवार को संभागायुक्त संदीप यादव, आइजी संतोष सिंह, कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम और एसपी सचिन शर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया।

सवारी मार्ग क्लियर न होने पर संभागायुक्त को छलांग लगाकर बाधाएं पार करना पड़ी। आधे से ज्यादा मार्ग का मुआयना फिर उन्होंने ई-कार्ट में बैठकर ही किया। संभागायुक्त सहित अन्य अधिकारियों ने महाकाल सवारी मार्ग और महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों को देखा।

मंदिर में और सवारी मार्ग पर भगवान महाकालेश्वर के दर्शन सुलभता से कराने की व्यवस्था बनाने के निर्देश कलेक्टर और मंदिर प्रशासक को दिए। बैरिकेडिंग की ऊंचाई का विशेष ख्याल रखने को कहा। कंट्रोल रूम पहुंच मंदिर और मंदिर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर को देखा। विस्तारित मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिए।

11 सितंबर को निकलेगी शाही सवारी

श्रावण एवं भादौ मास के प्रत्येक सोमवार को निकलने वाली भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के क्रम में प्रथम सवारी 10 जुलाई को निकाली जाएगी। शाही सवारी सोमवार 11 सितंबर को निकाली जाएगी। इस वर्ष अधिकमास है, इस कारण मंदिर और सवारी में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद प्रशासन ने जताई है।

घोषणाओं पर अमल नहीं

महापौर मुकेश टटवाल ने दो महीने पहले महाकाल सवारी मार्ग को चमकाने की घोषणा की थी। कहा था कि इस वर्ष महाकाल की सवारी कुछ नए रंग और आकर्षक लिए होगी। 4.2 किलोमीटर लंबा सवारी मार्ग चौड़ा होगा। राजपथ पर जिस प्रकार लोग गणतंत्र दिवस पर निकलती झांकी देखते हैं वैसे ही बगैर धक्का-मुक्की के महाकाल सवारी देख पाएंगे। मार्ग के सारे मकान, दुकान का रंग एक किया जाएगा।

गणगौर दरवाजा, सती गेट, चौबीस खंभा माता मंदिर, चौरासी महादेव मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, जगदीश मंदिर सहित पुरातन स्वरूप में बनी सभी धरोहरों को फसाड लाइट लगाकर रात में चमकाया जाएगा। चौराहों को त्रिशुल, डमरू, नंदी जैसे कलाकृतियां स्थापित कर संवारा जाएगा। पूरा मार्ग में भूमिगत वाटर सप्लाय, सीवरेज, इलेक्ट्रिसिटी लाइन बिछाई जाएगी। मार्ग इस तरह बनाया जाएगा कि महाकाल की सवारी देखने वाले भक्तों को आनंद की अनुभूती हो, हालांकि ऐसा हो नहीं पाया।

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