आतंकवादियों को चुन-चुन कर मारेंगे,’ अमित शाह ने पहलगाम के आतंकियों को दी चेतावनी

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निहत्थे पर्यटकों को श्रद्धांजलि देते हुए आज गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, 1990 के दशक से कश्मीर में जो आतंकवाद चला रहे हैं, उनके खिलाफ पीएम मोदी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सरकार मजबूती से उनके खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी, उचित दंड दिया जाएगा
बकौल अमित शाह, ‘हमारे 27 नागरिकों की जान लेकर आतंकवादी लड़ाई जीत गए हैं, उन्हें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए।’ उन्होंने कहा, वे यह संकल्प दोहराना चाहते हैं कि जब तक आतंकवाद समाप्त नहीं होगा, हमारी लड़ाई जारी रहेगी। जिन लोगों ने यह कृत्य किया है, उन्हें निश्चित रूप से उसका उचित दंड दिया जाएगा।
हर शख्स को चुन-चुन कर जवाब दिया जाएगा
शाह ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, ये लड़ाई का अंत नहीं, ये केवल एक पड़ाव है। हर शख्स को चुन-चुन कर जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर, वामपंथी उग्रवाद का क्षेत्र हो या कश्मीर पर आतंकवाद की छाया हो, सरकार ने सबका मजबूती से जवाब दिया है। अगर कोई कायराना आतंकी हमला कर समझता है कि ये उनकी बड़ी जीत है।
आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है
गृह मंत्री ने दहशतगर्दों को चेतावनी देते हुए कहा, ‘…किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस देश की इंच-इंच भूमि पर से आतंकवाद को मूल समेत उखाड़ने का हमारा संकल्प है। वह सिद्ध होकर रहेगा। इस लड़ाई में न केवल 140 करोड़ भारतीय, बल्कि पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है। लामबंद होकर दुनिया के सभी देश आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में भारत की जनता के साथ हैं।’
बोडोफा सभी छोटी जनजातियों के लिए महत्वपूर्ण
बता दें कि शाह ने जिस कार्यक्रम में पहलगाम आतंकी हमले पर टिप्पणी की, उसमें बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा की विरासत को सम्मानित करने के लिए सड़क और प्रतिमा का उद्घाटन भी किया गया। इस समारोह में शाह ने कहा, यह मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे दिल्ली की कैलाश कॉलोनी में बोडोफा के सम्मान में प्रतिमा का अनावरण और सड़क का उद्घाटन करने का अवसर मिला है। यह प्रतिमा न केवल बोडो समुदाय के लिए बल्कि उन सभी छोटी जनजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी भाषा, संस्कृति और विकास के लिए संघर्ष किया। बोडोफा की मूर्ति न केवल बोडो समुदाय बल्कि ऐसी सभी छोटी जनजातियों का सम्मान बढ़ाती है।



