मोदी सरकार खुद को अर्थव्यवस्था का डॉक्टर बताने वाली बीमारी को ठीक करने में नाकाम -विकास उपाध्याय

रायपुर। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय ने सोमवार को जारी हुए जीडीपी के आंकड़ों पर मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि खुद को अर्थव्यवस्था का डॉक्टर बताने वाली मोदी सरकार इस बीमारी का इलाज कर पाने पूरी तरह से असफल है। विकास उपाध्याय ने कहा है कि जारी आंकड़ों को देखें तो साल भर बाद भी अर्थव्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं दिखाई देता तो सवाल ये उठता है कि आखिर प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ के मेगाबूस्टर डोज के राहत पैकेज का क्या हुआ ? और उसका असर कब दिखाई देगा? विकास ने कहा है कि सोमवार को जारी किए गए जीडीपी के आंकड़े साफ-साफ बयां कर रहे हैं कि मोदी शासनकाल में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है। महंगाई दर,खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं और लोगों के खर्च करने की क्षमता घट रही है। जब आमदनी है ही नहीं है तो खर्च कहा से करें वाली स्थिति है। पिछले एक साल के अंदर देश में लगातार बनी हुई है। इसमें बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है। यही है भारत की बीमार अर्थव्यवस्था का मुख्य कारण। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जहां करीब 8 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा था। वहीं यह आंकड़ा 7.3 प्रतिशत पर ही थम गया है और इसी अवधि की चौथी तिमाही में यानी जनवरी से मार्च के बीच जहां 1.3 प्रतिशत बढ़त का अंदाजा था, वहां 1.6 प्रतिशत बढ़त दर्ज हुई है। उपाध्याय ने कहा है कि बीमार पड़ी अर्थव्यवस्था आईसीयू में न पहुंचे इसके लिए कोरोना की पहली लहर में मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी। उस राहत पैकेज का आखिर हुआ क्या और उसका असर कब दिखाई देगा? और क्या सरकार उतना खर्च कर पाई जितना उसने वादा किया था? विकास ने बताया कि इसमें से 10 फीसद भी ‘असल खर्च’ नहीं हुआ। इसमें से सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत प्रवासी मजदूरों के लिए ही 1 लाख करोड़ से 1.5 लाख करोड़ खर्च किया। इसके अलावा कुछ और मदों में हुए खर्च को जोड़ कर देखें तो केंद्र ने 2 लाख करोड़ से ज्यादा इस पैकेज में खर्चा नहीं किया है।



