पीएम विद्या लक्ष्मी योजना में दस लाख रूपये तक का ऋण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों (QHEI) में प्रवेश लेने वाला कोई भी छात्र, कोर्स से संबंधित ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों की पूरी राशि को कवर करने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से संपार्श्विक-मुक्त, गारंटर-मुक्त ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

 

यूजीसी प्रमुख ने बताई काम की बात

पीएम विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी मिलने पर UGC के चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने कहा, “मैं इसे मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं। इस योजना के तहत, सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हमारे छात्रों को 7.5 लाख रुपये तक का ऋण मिलेगा। छात्र इसके लिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी गारंटर की जरूरत नहीं है। इससे कई छात्रों को फायदा होगा। हमें उम्मीद है कि इस योजना के जरिए बड़ी संख्या में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे।”

कौन कर सकता है लोन के लिए आवेदन?

यूजीसी प्रमुख ने बताया कि जो छात्र केंद्रीय वित्त पोषित या 101 से 200 एनआईआरएफ रैंकिंग रखने वाले राज्य पोषित या 100 रैंक के भीतर आने वाले किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान में पढ़ रहे हैं, वे इस ऋण के लिए आवेदन करने के पात्र हैं।

यूजीसी प्रमुख जगदीश कुमार के अनुसार, जिन छात्रों की पारिवारिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें इस योजना के तहत 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3% ब्याज छूट का लाभ मिलेगा।

यह योजना 4.5 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले और अनुमोदित संस्थानों से तकनीकी, व्यावसायिक पाठ्यक्रम करने वाले छात्रों के लिए केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी (सीएसआईएस) और शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना (सीजीएफएसईएल) की पूरक होगी।

ऐसे छात्रों को शिक्षा ऋण पर अधिस्थगन अवधि के दौरान ब्याज में पूरी छूट मिलेगी। 7.5 लाख रुपये तक के ऋण के लिए, छात्र बकाया डिफॉल्ट के 75% की क्रेडिट गारंटी भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे योजना के तहत छात्रों को शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने में बैंकों को सहायता मिलेगी।

सरकारी संस्थानों के छात्रों को प्राथमिकता

पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो सरकारी संस्थानों से पढ़ाई कर रहे हैं और उन्होंने तकनीकी/व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का विकल्प चुना है।

प्रतिवर्ष 22 लाखों छात्रों को मिलेगा लाभ

देश के शीर्ष 860 गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले मेधावी छात्रों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस पहल से हर साल 22 लाख से अधिक छात्रों को लाभांवित किया जाएगा। 2024-25 से 2030-31 के दौरान 3,600 करोड़ का परिव्यय किया गया है, और इस अवधि के दौरान 7 लाख नए छात्रों को इस ब्याज छूट का लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस स्कीम के तहत लोन के लिए आवेदन करने के लिए छात्रों को किसी गारंटर की जरूरत नहीं होगी। पात्र उम्मीदवार पीएम विद्यालक्ष्मी ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर सीधे लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

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