पाकिस्तान का 5000 साल पुराना हिन्दू मंदिर: जहां गिरे थे बाबा भोले के आंसू

नई दिल्ली. पड़ोसी मुस्लिम देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल में प्राकृतिक छटा के बीच एक ऐसा हिन्दू मंदिर है, जिसका पौराणिक महत्व है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिरा का इतिहास 5000 साल पुराना है। यह महाभारत काल का मंदिर है। इसे कटासराज मंदिर के रूप में जाना जाता है जो चकवाल जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अपनी पत्नी सती के साथ यहीं रहते थे। सती की मृत्यु के बाद उनकी याद में तांडव करते भगवान शिव के आंसू यहां गिरे थे। कहा जाता है कि दुखी शिव इतना रोए कि उनके आंसुओं से यहां तालाब बन गया। भगवान शिव के आंसुओं से राजस्थान के पुष्कर में भी ऐसा ही तालाब बना है।

क्या है पौराणिक महत्व?
करोड़ों हिन्दुओं के लिए इस मंदिर का पौराणिक महत्व है। मंदिर के अंदर एक कटाक्ष कुंड है। वहां के तालाब और मंदिर का नाम भी कटास के नाम पर है, जिसका अर्थ आंखों में आंसू से होता है। शिवरात्रि के मौके पर यहां भारत से भी हिन्दू श्रद्धालु जमा होते हैं। इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है लेकिन भक्तगण यहां भगवान शिव के दुख की वंदना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सतग्रह क्यों कहते हैं?
कटासराज मंदिर को सतग्रह भी कहते हैं क्योंकि  वहां सात पुराने मंदिरों का एक समूह है। इसके अलावा वहां एक बौद्ध स्तूप के अवशेष, एक जोड़ा मध्यकालीन अभयारण्य, कुछ हवेलियां भी हैं, जो हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली झील के चारों ओर फैले हुए हैं।

कटासराज मंदिर का ऐतिहासिक महत्व:
1872-73 CE में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक एलन कनिंघम के अनुसार,
ज्वाला मुखी के बाद हिंदुओं के लिए कटासराज पंजाब में दूसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थान है। ऐसा कहा जाता है कि पांडवों ने कटास और सतग्रह के अभयारण्यों में ही अपने वनवास के 12 महत्वपूरण साल बिताए थे।

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