पॉवर कंपनी की उपभोक्ताओं पर सात हजार करोड़ की लेनदारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की पाॅवर कंपनी की उपभोक्ताओं पर सात हजार करोड़ से ज्यादा की लेनदारी हो गई है।इसकी वसूली में कंपनी का पसीना छूट रहा है। सबसे ज्यादा उधार तेलंगाना की पॉवर कंपनी पर 36 सौ करोड़ का है। तेलंगाना तो पूरा उधार मानने भी तैयार नहीं है। इधर प्रदेश सरकार के सरकारी विभागों पर 13 सौ करोड़ का उधार हो गया है। आम उपभोक्ताओं को कोरोना काल में राहत देने के कारण इस पर दो हजार करोड़ से ज्यादा का उधार चढ़ गया है।
प्रदेश में आम उपभोक्ता पर थोड़ा सा बकाया होने पर उनकी बिजली कट करने पॉवर कंपनी के कर्मचारी पहुंच जाते हैं। आम उपभोक्ताओं से वसूली का काम पूरे प्रदेश में चल रहा है। अब यह बात अलग है कि पहली बार कोरोना काल में जरूर आम उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए उनको राहत देते हुए कोरोना काल में बिजली नहीं काटी गई थी, लेकिन अब जिनका बकाया है, उनकी बिजली काटी की जा रही है। लेकिन सरकारी विभागों की बिजली कभी कट नहीं की जाती है। यही वजह है कि सरकारी विभाग हमेशा से बेलगाम रहे हैं। ये बिल ही जमा नहीं करते हैं। अंत में पॉवर कंपनी को प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर बजट में विभागीय बजट से ही बिलों का भुगतान लेना पड़ता है।
तेलंगाना से बकाया पर विवाद
राज्य पॉवर कंपनी की मड़वा में जो 500 मेगावाट की दो यूनिट है, उसके प्रारंभ होने से पहले ही भाजपा शासनकाल में इन यूनिट से बनने वाली पूरी बिजली तेलंगाना को देने का अनुबंध हो गया था। इन यूनिट में जब सात साल पहले उत्पादन प्रारंभ हुआ तो इसकी पूरी बिजली तेलंगाना को ही देना प्रारंभ किया गया। तेलंगाना को लगातार बिजली तो दी गई लेकिन किसी ने यह जानने का प्रयास ही नहीं किया कि वहां से उसका पूरा भुगतान हो रहा है या नहीं। यही वजह है कि तेलंगाना पर 36 सौ करोड़ का उधार हो गया है। इसमें से तेलंगाना ने 21 सौ करोड़ का ही उधार माना है, जबकि बचे 15 सौ करोड़ काे लेकर विवाद चल रहा है।
सरकारी विभागों ने भी दबाएं बिल
प्रदेश सरकार के सरकारी विभागों पर जो 13 सौ करोड़ का उधार है, उसमें से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 500 करोड़ से ज्यादा का बकाया हो गया है। इसी तरह से नगरीय निकाय एवं विकास विभाग 422 करोड़, स्कूल शिक्षा विभाग 60 करोड़, गृह विभाग 26 करोड़, आवास एवं पर्यावरण 20 करोड़, महिला एवं बाल विकास 13 करोड़, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन 12 करोड़, लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण विभाग 18 करोड़, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 11 करोड़, वन विभाग 6 करोड़, आदिम जाति विभाग एवं लोक निर्माण विभाग पर 5-5 करोड़ का बकाया है। जहां एक तरफ सबसे ज्यादा उधार वाले विभाग हैं, वहीं कुछ ऐसे विभाग भी हैं जिन पर बकाया कम है। ऐसे विभागों में सबसे ज्यादा बकाया विधि विधायी विभाग पर एक करोड़ 53 लाख रुपए है। इसके बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर 1 करोड़ 12 लाख का बकाया है। अन्य विभागों में उच्च शिक्षा पर एक करोड़ दस लाख, ग्रामोद्योग पर 76 लाख, सहकारिता विभाग पर 65 लाख के साथ ही कई विभागों पर एक से 25 लाख तक का बकाया है।



