भारतीय फैंस के लिए आज के दिन की खट्टी-मीठी यादें

भारतीय क्रिकेट के लिए आज का दिन खट्टी-मीठी यादों से जुड़ा है। दरअसल, 23 दिसंबर को जहां कैप्टन कूल की इंटरनेशनल क्रिकेट में एंट्री हुई थी, वहीं क्रिकेट के भगवान ने वनडे फॉर्मेट को अलविदा कहा था। जी हां, आज ही के दिन 2004 में महेंद्र सिंह धोनी ने अपना पहला वनडे मैच बांग्लादेश के खिलाफ खेला था और सचिन तेंदुलकर ने 50 ओवर फॉर्मेट को अलविदा कहकर हर किसी की आंखें नम कर दी थी। वैसे सचिन ने अपना आखिरी वनडे पाकिस्तान के खिलाफ 18 मार्च 2012 को खेला था।y
सचिन तेंदुलकर के इंटरनेशनल करियर की बात करें तो उनके नाम इस फॉर्मेट में सबसे अधिक मैच खेलने के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट में खेले 463 मैचों में 44.83 की लाजवाब औसत के साथ 18426 रन बनाए थे। इस दौरान उनके नाम 49 शतक के साथ 96 अर्धशतक भी शामिल है। अपने करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर ने 62 मैन ऑफ द मैच के साथ 15 मैन ऑफ द सीरीज के अवॉर्ड भी जीते।
बल्लेबाजी के अलावा गेंदबाजी में भी सचिन का जलवा रहा। उनके नाम वनडे क्रिकेट में 154 विकेट दर्ज है, इसमें 2 बार उन्होंने एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट लिए थे। वनडे क्रिकेट में सचिन दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी थे। यह कारनामा उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ किया था।
बात धोनी के करियर की करें तो उनके वनडे करियर की शुरुआत और अंत रन आउट के साथ हुआ था, मगर इस बीच उन्होंने बतौर फीनिशर खूब नाम कमाया था। सौरव गांगुली की कप्तानी में धोनी को डेब्यू का मौका मिला था। पाकिस्तान के खिलाफ पहला शतक जड़ने के बाद उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की धुआंधार पारी खेली थी।
धोनी ने 2007 में पहली बार टीम इंडिया की कप्तानी करने का मौका मिला था। यह मौका उन्हें सचिन तेंदुलकर की ही सिफारिश के चलते मिला था। Infosys के एक इवेंट में सचिन तेंदुलकर ने धोनी को कप्तान बनाए जाने की कहानी के बारे में बताया ‘यह इंग्लैंड में था जब मुझे कप्तानी की पेशकश की गई थी। मैंने कहा कि हमारे पास टीम में एक बहुत अच्छा लीडर है जो अभी जूनियर है और वह ऐसा व्यक्ति है जिसे आपको करीब से देखना चाहिए। मैंने उसके साथ बहुत सारी बातचीत की है, विशेष रूप से मैदान पर जहां मैं पहली स्लिप में फील्डिंग करता और उससे पूछा कि आप क्या सोचते हैं?’
सबसे पहले धोनी ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में टीम की अगुवाई की थी, जहां भारत खिताब जीतने में सफल रहा था। इसके बाद धोनी की कप्तानी में भारत ने 2011 वर्ल्ड कप के साथ 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती। धोनी दुनिया के एकमात्र ऐसे कप्तान हैं जिनके नाम ये तीन आईसीसी खिताब हैं।



