सैकड़ों गांव और 1 लाख किलोमीटर रोड नेटवर्क

नई दिल्ली. अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में स्थित यांग्त्से में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प ने एक बार फिर से दोनों देशों के बीच रिश्तों को निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। इस झड़प के चलते भारत की चिंता वास्तविक सीमा रेखा के एकदम निकट चीन की ओर से बसाए गए गांवों को लेकर बढ़ गई है, जिनका इस्तेमाल पीपल्स लिबरेशन आर्मी अतिक्रमण के लिए करती रही है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के करीब सैकड़ों गांव बसा लिए हैं। कई लोगों का कहना है कि इन गांवों के चलते भारतीय सेना को अकसर अतिक्रमण का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर भारतीय चौकियों के निकट जहां आबादी है, वहां अकसर झड़प के हालात रहते हैं।

नाम उजागर न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ‘इन गांवों का चीन दोहरा इस्तेमाल कर रहा है। इनके जरिए वह सीमा पर सैनिकों का जुटान कर लेता है और फिर योजना के साथ अतिक्रमण की कोशिश रहती है। इस बात की पूरी संभावना है कि यांग्त्से में सैनिकों के जुटान के लिए चीनी सेना ने इन गांवों का ही इस्तेमाल किया था।’ बीते कुछ सालों में सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि चीन ने भारत के साथ विवाद का मसला बने इलाकों के आसपास बड़े पैमाने पर गांव बसाए हैं। खासतौर पर यांग्त्से के निकट इन गांवों की बड़ी संख्या है, जो तवांग के उत्तर पूर्व में पड़ता है।

क्यों भारत की चिंता बढ़ा रहे हैं चीन के सीमांत गांव

यांग्त्से में इस झड़प ने इन गांवों को लेकर भारत की चिंता नए सिरे से बढ़ा दी है। यही वजह है कि भारत सरकार ने भी सीमांत इलाकों में गांवों को बसाने की तैयारी की है। इसी के तहत इस साल की शुरुआत में मोदी सरकार ने वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम का ऐलान किया था। इस स्कीम के तहत सीमांत गांवों में बसने वाले लोगों को कनेक्टिविटी से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर तक की सुविधाएं दी जाएंगी। बीते सप्ताह यांग्त्से में जब दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव हुआ तो पीपल्स लिबरेशन आर्मी के 300 जवान थे। इन लोगों ने एकजुट होकर भारतीय चौकी पर हमले की कोशिश की थी, लेकिन खदेड़ दिए गए।

जानकार बोले- रूटीन गश्त नहीं झड़प के इरादे से ही आए चीनी सैनिक

सैन्य मामलों के एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट जनरल राकेश शर्मा (रिटायर्ड) ने कहा, ‘एक सामान्य पेट्रोलिंग में करीब 50 सैनिक ही होते हैं। लेकिन चीनी टुकड़ी में 300 सैनिक होने का मतलब साफ है कि यह रूटीन ऑपरेशन नहीं था। इसे पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड की ओर से मंजूरी भी दी गई होगी और सेंट्रल कमांड को भी इसके बारे में जानकारी रही होगी। इस बात की पूरी संभावना है कि यांग्त्से में सीमा के पास बसे गांवों का इस्तेमाल चीन ने भारत के खिलाफ मिशन के लिए किया था।’ चीन ने शिनजियांग से लेकर भूटान तक सीमा के करीब लगातार गांवों का निर्माण किया है। यहां एयरपोर्ट तक बनाए गए हैं ताकि भारत जैसे देश पर दबाव बन सके।

सीमांत इलाकों में चीन ने बनाईं 1 लाख 18 हजार km सड़कें

रक्षा मामलों के जानकार कहते हैं कि करीब एक दशक से चीन ने 4,000 किलोमीटर लंबी तिब्बत सीमा पर गांवों को बसाने के लिए बड़ी रकम खर्च की है। तिब्बत पर अपनी दावेदारी को मजबूत रखने के लिए भी चीन इस रणनीति पर काम कर रहा है। इन सभी गांवों में चीन ने कनेक्टिविटी बढ़ाई है। इसके अलावा मोबाइल कॉम्युनिकेश जैसी सुविधाओं में भी इजाफा किया है। एक पॉलिसी पेपर के मुताबिक चीन ने स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र में कनेक्टिविटी के लिए  118,800 किलोमीटर लंबे हाईवे तैयार किए हैं।

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