अलग दुनिया में ले जाती है ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’

‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ के लिए दर्शक बीते लंबे वक्त से इंतजार कर रहे थे और अब वो इंतजार पूरा हो चुका है। बात अगर अवतार 2 की कहानी की करें तो इसकी कहानी बताने में काफी सिंपल है, लेकिन दिखाने में इसका तोड़ नहीं है। फिल्म वहीं से शुरू होती है, जहां से पिछला पार्ट खत्म हुआ था। पैंडोरा अब सुरक्षित है, जेक सुली का परिवार धीरे -धीरे बड़ा हो चुका है और अब उसके परिवार में बेटियां और बेटे भी हैं। सब अच्छा चल रहा होता है, लेकिन कर्नल क्वारिच किसी तरह से वापस आ गया है और उसे जेक से बदला लेना है। अब क्वारिच बदला ले पाता है या नहीं….? जेक अपने परिवार को बचाने के लिए क्या कुछ करता है ? जेक की मदद के लिए कौन आगे आते है? और कौन इस लड़ाई में गुजर जाता है? ऐसे ही ढेर सारे सवालों के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

क्या है फिल्म में खास और कहां खाई मात: अवतार के पहले पार्ट ने न सिर्फ ढेर सारे अवॉर्ड्स जीते थे बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी कई रिकॉर्ड्स बनाए थे। ग्लोबली सबसे अधिक कमाई करने वाली लिस्ट में अवतार का भी नाम शामिल है। अब 12 साल फिल्म का दूसरा पार्ट रिलीज हो रहा है और इसके लिए दर्शकों में काफी एक्साइटमेंट है। वहीं अच्छी बात ये है कि फिल्म देखने के बाद आपकी एक्साइटमेंट पॉजिटिव ही रहती है। फिल्म का तकनीकी पक्ष बेजोड़ है। फिल्म के विजुअल्स और वीएफएक्स बेहद शानदार हैं और सीन्स को लार्जर देन लाइफ बनाने का काम करते हैं। पहले पार्ट में जहां जंगल और उससे जुड़े इलाकों को दिखाया गया था तो इस बार अधिकतर खेल पानी में हैं और ये काफी रोमांचित करता है। फिल्म की कहानी भी काफी अच्छी है और एक ओर जहां कई सीन्स पर ताली बजाते हैं, तो कुछ पर हंसते भी हैं और वहीं कुछ सीन्स आपको इमोशनल भी करते हैं। फिल्म की लंबाई करीब 192 मिनट है। करीब 3 घंटे की फिल्म की शुरुआत थोड़ी स्लो है और फिल्म पिच पर आने में वक्त लेती है। ऐसे में अगर फिल्म का शुरुआती हिस्सा थोड़ा सा तेजी से आगे निकलता तो इंतजार लंबा नहीं होता।

देखें या नहीं:
साल 2009 में रिलीज हुई जहां अवतार ने विजुअल सिनेमा को एक नए स्तर पर ले जाने का काम किया था तो वहीं एक बार फिर जेम्स का जादू चला है। ‘अवतार द वे ऑफ वॉटर’ हाल फिलहाल ग्लोबल सिनेमा को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है। फिल्म को देखने से पहले एक बात जरूर ध्यान रखें कि इस फिल्म को कोशिश करके आईमैक्स स्क्रीन्स पर देखें वरना कम से कम 3डी में तो देखे ही हैं, अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इस फिल्म का मैजिक ही खत्म हो जाएगा। इस फिल्म को आपको बेशक अपने परिवार के साथ सिनेमाघर में देखना चाहिए। हालांकि हो सकता है कि सिंगल स्क्रीन ऑडियंस और बुजुर्ग लोगों को ये फिल्म कुछ खास न पसंद आए।

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