गैंगरेप से मेरी बेटी मां बनी और गुनहगार भी

मेरी बेटी 12 साल की है। गैंगरेप और मां बनने के मायने तक नहीं जानती, लेकिन खेलने-कूदने की इस उम्र में उसने एक बच्चे को जन्म दिया है। बच्चा ऑपरेशन से हुआ है। मेरी लड़की की हालत ठीक नहीं है।

रुंधे गले के साथ यह दास्तां बयां की है उन्नाव के मौरांवा की एक गैंगरेप पीड़िता की मां ने। उसकी बेटी के साथ फरवरी, 2022 को गांव के ही तीन युवकों ने गैंगरेप किया था। हालात कुछ ऐसे बने कि दरिंदगी के 8 महीने बाद उसे बच्चे को जन्म देना पड़ा।

भास्कर टीम ने गैंगरेप पीड़िता, उसके माता-पिता से उनका दर्द जाना। कैसे उस मासूम पीड़िता ने आठ महीने तक अनचाहे बच्चे को कोख में पाला और मां-बाप ने समाज के तानों को सहा।

आइए अब आपको बच्ची और उसकी मां के पास ले चलते हैं…

बिटिया बेड पर जैसे-तैसे करवट बदल रही है। टूटी-फूटी आवाज में पीड़िता और उसकी मां बताती हैं, “बात 13 फरवरी, 2022 की है। मेरी बेटी शाम को साढ़े सात बजे के करीब दुकान से चीनी लेने जा रही थी। तभी गांव के तीन युवक उसे उठाकर गांव के कब्रिस्तान में ले गए। वहां मेरी बेटी के साथ तीनों ने गैंगरेप किया।”

“मेरी बेटी अस्त-व्यस्त हालत में काफी रात को मिली। उसने डरते-डरते हमें सारी बात बताई। उसकी हालत देखकर हम लोग घबरा गए। अगले दिन बिटिया के पापा थाने गए और उन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने बिटिया के बयान दर्ज कराए और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हम दरिंदों को सजा दिलाने और बिटिया को न्याय मिलने की उम्मीद लेकर काम में लग गए।”

उन्नाव में जब पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया ये फोटो उस दिन की है।

उन्नाव में जब पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया ये फोटो उस दिन की है।

तीन महीने बाद पता चला कि वह गर्भवती है
मां बताती हैं, “मेरी बेटी गुमसुम सी बनी रहती थी। गांव के लोग भी उसे हिकारत भरी नजरों से देखते थे। दो महीने बाद बिटिया ने बताया कि पेट में दर्द हो रहा है। हमने उसे पास के ही डॉक्टर से पेट दर्द की दवाई दिला दी। जब वह दवा खा लेती, तो आराम हो जाता था। जैसे ही दवाई का असर खत्म होता, फिर पेट दर्द होने लगता। करीब तीन महीने तक इसी तरह चलता रहा, लेकिन जब आराम नहीं मिला तो हम उसे दूसरे डॉक्टर के पास लेकर गए। अस्पताल में जांच पर पता चला कि बेटी 3 महीने की गर्भवती है।”

गैंगरेप पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया है। वह अभी कानपुर के हैलट अस्पताल में है। मां-बाप वहीं उसका इलाज करा रहे हैं।

गैंगरेप पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया है। वह अभी कानपुर के हैलट अस्पताल में है। मां-बाप वहीं उसका इलाज करा रहे हैं।

बेटी का गर्भपात कराते तो जान चली जाती
मां ने कहा, “गैंगरेप के दर्द से उबर भी नहीं पाए थे कि एक और दर्द मिल गया। हमने डॉक्टर से गर्भपात की सलाह मांगी तो उन्होंने कहा कि ऐसा करने से बच्ची की जान को खतरा है। इस बात की सूचना हमने पुलिस को भी दी, लेकिन उन्होंने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद हमने उस बच्चे को जन्म दिलाने का फैसला कर लिया।

हम हर महीने बेटी को लेकर डॉक्टर के पास जाते थे। जैसे-जैसे बेटी का पेट बड़ा हो रहा था, उसका घर से निकलना दूभर होता जा रहा था। गांव के कई लोग उसको ऐसे घूरती नजरों से देखते थे जैसे मेरी बेटी ने ही गुनाह किया हो। यही नहीं गांव वाले ताने भी मारते थे। मेरी बेटी दर्द से कराहती रहती थी और हम दर्द कम होने का इंतजार करते रहते थे।”

दर्द बढ़ा तो 8वें महीने में ऑपरेशन कराना पड़ा
सिसकते हुए मां कहती है, “8 महीने से ताने सुनते चले आ रहे थे। एक दिन बेटी की हालत अचानक बिगड़ गई। पेट में बहुत तेज दर्द होने लगा, तो हम उसे लेकर उन्नाव के अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बेटी का ऑपरेशन किया। उसने एक बेटे को जन्म दिया।

जन्म के बाद उसके बेटे को अलग कर दिया गया। ठीक से इलाज भी नहीं किया जा रहा था। शिकायत की तो मेरी बेटी और उसके बच्चे को कानपुर के लिए रेफर कर दिया। यहां भी कोई मदद नहीं कर रहा। खुद एक रुपए का पर्चा बनवाकर भर्ती कराया है। यहां मेरी हालत ठीक नहीं है, बेटी जिंदगी और मौत से लड़ रही है।”

बिटिया सुरक्षित है, बेटे को भी पालूंगी
मां खुद को मजबूत करते हुए कहती है, “भगवान का शुक्र है कि मेरी बिटिया सुरक्षित है। उसने जिस बेटे को जन्म दिया है, मैं उसे भी पालूंगी, लेकिन हमारी मांग न्याय की है जो हमें मिलना ही चाहिए।”

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