जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने हाईकोर्ट से कहा…

सीएए और एनआरसी के खिलाफ दो साल पहले देश की राजधानी में हुए दंगे से जुड़े एक यूएपीए मामले में 9 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू के छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर शुक्रवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इसके पीछे की वजह उनके वकील की जिरह को माना जा रहा है। खालिद के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल की न तो हिंसा में कोई आपराधिक भूमिका थी और न ही कोई मामले में किसी अन्य आरोपी के साथ षडयंत्र में शामिल था।
क्या सीएए का विरोध करना अपराध है
इससे पहले सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार खालिद ने तर्क दिया था कि उसके खिलाफ अभियोजन के मामले का समर्थन करने के लिए कोई सामग्री नहीं थी और उसने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया जो कि अपराध नहीं था। खालिद का कहना है कि क्या सीएए का विरोध करना अपराध है? खालिद के वकील ने यह भी कहा कि छात्र नेता के अमरावती भाषण में सीएए के खिलाफ आरोपों का आधार न केवल अहिंसा के लिए एक स्पष्ट आह्वान था बल्कि कहीं भी हिंसा नहीं हुई।
खालिद के वकील का कहना है कि दिल्ली पुलिस के आरोप पत्र के कुछ हिस्सों का कोई आधार नहीं था और अभियोजन द्वारा कथित साजिश दिल्ली में हिंसा की ओर होनी चाहिए न कि अन्याय के मुद्दों को उठाना। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की विशेष पीठ से खालिद के वकील ने कहा कि भाषण में अहिंसा का स्पष्ट आह्वान था जिसे समग्र रूप से देखा जाना चाहिए न कि उस तरीके से जिस तरह से अभियोजन ने किया था।



