शपथपत्र में किया था सिर्फ डेढ़ लाख कैश का दावा : ममता सरकार

कोलकाता. शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के कैबिनेड मंत्री पार्थ चटर्जी के भले ही 22 करोड़ रुपये कैश बरामद हुए हों लेकिन अगर आधिकारिक घोषणा की बात करें तो वह टीएमसी के शासनकाल में लगातार ‘गरीब’ ही होते गए हैं। इस हिसाब से मार्च में उनके पास 1.48 करोड़ रुपये कैश था। ईडी ने दावा किया था कि पार्थ की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से बड़ी रकम बरामद हुई थी जो कि शिक्षक भर्ती घोटाले से ही जमा की गई थी। शनिवार को चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अर्पिता मुखर्जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
10 साल में आधी हो गई आय
विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले नामांकन के हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक पार्थ चटर्जी की संपत्ति लगातार कम हुई है। इसके अलावा इनकम टैक्स रिटर्न के मुताबिक भी पिछले 10 साल में उनकी आय कम होकर आधी हो गई है। 2010-11 में उनकी वार्षिक आय 11.64 लाख प्रति वर्ष थी। मई 2011 में टीएमसी ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई थी। इसके बाद से चटर्जी की इनकम घटने लगी। 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले हलफनामे में उन्होंने 7.83 लाख की वार्षिक आय की घोषणा की थी।
2021 के विधानसभा चुनाव से पहले एफिडेविट में उन्होंने केवल 5.39 लाख की वार्षिक आय दिखायी। इस हिसाब से उनकी महीने की आय केवल 45 हजार रुपये थी। नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे में उन्होंने कहा था कि उनके पास 1.48 लाख रुपये कैश हैं। इसके अलावा ढाई मंजिल का एक मकान है जिसकी कीमत लगभग 25 लाख रुपये है। इसके अलावा उनके पास कुछ म्यूचुअल फंड और पॉलिसीज हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी आय का स्रोत केवल सैलरी और बैंक से मिलने वाला ब्याज है।
इस बीच ईडी ने 21.9 करोड़ रुपये कैश, 50 लाख से ज्यादा कीमत के डॉलर और 70 लाख से ज्यादा की जूलरी अर्पिता मुखर्जी के ठीकने से जब्त की। चटर्जी के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके घर से ईडी ने कोई कैश नहीं बरामद किया है। अब ईडी प्लान बना रही है कि दोनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी। ईडी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती के लिए बड़ी रकम ली गई। इसमें गड़बड़ी की गई। उस वक्त चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री थे।
ईडी ने कोर्ट में बताया, जांच में पता चला है कि मुखर्जी और चटर्जी लगातार संपर्क में रहते थे। वे दोनों ही आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त थे। जो कैश उनके ठिकाने से मिला है वह अपराध का ही नतीजा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि अर्पिता मुखर्जी ने ईडी को बता दिया कि उनके फ्लैट से मिली रकम पार्थ चटर्जी की थी। टीएमसी ने चटर्जी के इस मामले से पहले ही दूरी बना ली है। वहीं ममता बनर्जी ने भी कहा है कि वह अर्पिता मुखर्जी को नहीं जानती हैं।



