दिल्ली हाईकोर्ट: नाबालिग से संबंध बनाना कानून की नजर में अपराध

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से रेप के मामले में एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ किया कि यौन शोषण के बाद नाबालिग और आरोपी की शादी होने या उसे बच्चा हो जाने से रेप की गंभीरता खत्म नहीं हो जाती। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में नाबालिग की सहमति कानून में कानून में अप्रासंगिक है। नाबालिग की माँ द्वारा दायर FIR पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये अहम टिप्पणी की और आरोपी को जमानत देने से भी इनकार कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा ‘किसी भी नाबालिग को बहला-फुसलाकर संबंध बनाने के बाद उससे शादी करने के बाद उसकी सहमति के दावे कानून के अनुरूप नहीं है। इससे रेप की गंभीरता खत्म नहीं होती, ये न केवल पीड़िता के खिलाफ ही नहीं बल्कि समाज के खिलाफ भी अपराध है।’

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पीड़िता की माँ ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया था और आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय बेटी का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया। उसकी बेटी जुलाई वर्ष 2019 से गायब है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की और पीड़िता को 5 अक्टूबर 2021 मोबाइल सर्विलांस के आधार पर बरामद कर लिया। जब लड़की मिली तो वो शादीशुदा थी और वो डेढ़ माह की गर्भवती भी थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उनकी लड़की को 27 वर्षीय लड़के ने बहला-फुसलाकर मंदिर में शादी के लिए राजी करवाया था।

कानून की नजर में नाबालिग से संबंध बनाना अपराध है
वहीं, आरोपी के वकील का तर्क है कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे और आरोपी पीड़िता और उसके बच्चों की देखभाल करेगा। बता दें कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 376 और 366 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 5 के तहत मामला दर्ज है।

सभी दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी नाबालिग के साथ संबंध बनाना निषिद्ध है भले ही इसमें उसकी सहमति ही क्यों न हो। इस कारण यदि नाबालिग किसी बच्चे को जन्म देती है तो ये बलात्कार जैसे गंभीर कृत्य से कम नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है।

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