बस्तर में जर्जर स्कूल भवनों में लग रहे स्कूल , रोज दुर्घटना हो रही , सरकार अब भी बेहोश – तरुणा साबे बेदरकर

आप नेता बोली- आत्मानंद और बाकी स्कूलों में शिक्षक के स्तर पर सवालिया निशान? सिर्फ रंगरोगन से स्तर नही सुधरेगा –

जगदलपुर ।आम आदमी पार्टी की बस्तर जिला अध्यक्ष तरुणा साबे बेदरकर ने आज प्रदेश में जर्जर स्कूल भवनों का लेकर कुंभकर्णी नींद सो रही भूपेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिला में लग रहे स्कूल भवनों की स्कूल बंद रहते हुए भी मरम्मत नहीं की गई और न ही सुध ली गई सिर्फ राजनीतिक खेल खेलते भूपेश सरकार का समय जा रहा है। आत्मानंद स्कूल का सिर्फ खूब प्रचार प्रसार हुआ, दिखावे के लिए कुछ शालाओं के भवनों में करोड़ों रुपए खर्च कर, बेतहाशा भ्रष्टाचार कर , कार्य करवाए गए। अमूमन बस्तर के बाकी स्कूल जस के तस सिर्फ रंग लगाकर लीपापोती कर दी गई और भगवान भरोसे छोड़ दिया गया । बारिश में अब आए दिन दुर्घटना हो रही है कही छत का प्लास्टर गिर रहा है तो कही छत । अभिवावक परेशान है पता नही कब क्या हो जाए , रोज दुर्घटना हो रही , भूपेश सरकार अब भी बेहोश है।

एक घटना अभी प्रकाश में आई है कि जर्जर हो चुके भवनों में लग रहे है स्कूल, हर पल दशहत में परिजन व शिक्षक लेकिन सरकार के कान पर जूं भी नही रेंग रही है।
दूसरी घटना एक आत्मानंद स्कूल की है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल भवन का छप्पर ही उड़ गया। इसकी वजह से स्कूल के अंदर रखा सामान तेज बारिश में भीग गया। पूरे स्कूल परिसर में निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जल जमाव हो गया है। अभी एक माह पूर्व ही इस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का कायाकल्प मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए पूर्ण किया गया था।आत्मानंद स्कूल के भवन की जर्जर छत धराशायी हुई है। इसी बीच तेज हवाओं के साथ हुई बारिश की वजह से एक छप्पर उड़ गया। इससे भवन में हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल है। अच्छी बात यह रही कि इस दौरान यहां कोई बच्चे या स्टाफ नहीं था, नहीं तो बड़ा हादसा हो जाता।
तरुणा ने कहा कि प्रदेश के बच्चो के साथ शिक्षा स्तर को लेकर सिर्फ खिलवाड़ किया जा रहा। गांव के ग्रामीणों और स्कूल में शिक्षा हासिल कर रहे बच्चों के प्राइमरी स्कूल की आधे से ज्यादा ने अपनी आप बीती बताते हुए कहा कि जर्जर छत का आलम यह है की कभी भी यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बच्चों सहित शिक्षको को सदैव अनहोनी का खतरा बना रह रहा है।बहुत से अन्य जिलों में पहली बारिश की तेज हवाओं ने प्लास्टर गिरा है और कही कही छत तेज हवा से उड़ गई है।
इसके अलावा अंग्रेजी शिक्षा का कबाड़ा होते लगभग पूरे प्रदेश में देखा जा सकता है। रोजगार कैसे मिलेगा यदि शिक्षा का स्तर ही इतना खराब रहा ।इधर शासन शिक्षा के नाम पर करोड़ों खर्च कर रही है । नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही शिक्षा गुणवत्ता भी सामने आने लगी है। प्राथमिक शाला के बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा नहीं मिल पा रही। ऐसा इसलिये क्योंकि स्कूल में शिक्षकों की अंग्रेजी अत्यंत कमजोर है। स्कूल की दीवार पर सप्ताह के सातों दिनों के नाम और अंग्रेजी वर्ष के महीनों के नाम अंग्रेजी में लिखे है, लेकिन कई त्रुटियां इसमें नजर आ रही हैं. हद तो तब हो गयी जब शिक्षक ही इसे गलत बता रहे, लेकिन सही स्पेलिंग शिक्षकों को भी नहीं पता है।

अब भी जागे और केजरीवाल जी के शिक्षा मॉडल की सिर्फ नकल न कर पूरी शिक्षा नीति का अनुसरण करे और प्रदेश के सभी स्कूल दुरुस्त कर शिक्षा स्तर में सुधार करे। जनता सब देख रही है अन्यथा विदाई तय समझे आने वाले दिनों में विधान सभा चुनाव के बाद।

Related Articles

Back to top button