महात्मा गांधी पर बयान देने वाले कालीचरण की नहीं हो पाई रिहाई, फिर फंसा पेंच

रायपुर. धर्म संसद में महात्मा गांधी पर अशोभनीय टिप्पणी करने और राजद्रोह के मामले में जेल में बंद हिंदू धर्मगुरु कालीचरण महाराज (Kalicharan Maharaj) की जमानत पर फिर से पेंच फंस गया है. रविवार को भी उनकी रिहाई नहीं हो सकी है. धर्मगुरु कालीचरण की रविवार को भी रिहाई नहीं होने पर उनके समर्थकों में मायूसी देखने को मिली. 94 दिनों से जेल में बंद कालीचरण तकनीकि कारणों से रविवार को रिहा नहीं हो सके. रायपुर सेंट्रल जेल अधिकारियों ने कालीचरण को रिहा करने से इनकार कर दिया है. अधिकारियों ने महाराष्ट्र के ठाणे कोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश को मानने से इनकार कर दिया है. जेल अधिकारियों के मुताबिक उनके पास बाईपोस्ट कोई भी आर्डर नहीं आया है. कालीचरण के वकील बिंदु ने ठाणे कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की कॉपी को प्रस्तुत किया.
साथ ही जेल अधिकारियों के रवैए पर नाराजगी जताई है. कालीचरण के वकील महाराष्ट्र से जमानत के दस्तावेज बाई हैंड लेकर पहुंचे थे. मगर जेल प्रबंधन ने उस आदेश को लेने से इनकार किया और जेल मैनुअल के हिसाब से रिहाई टल गई. इस बीच उनके वकील ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि यह अदालत की अवमानना है. वकीलों ने जेल प्रबंधन से बात की मगर बात नहीं बनी. विगत दो दिनों से कालीचरण की रिहाई टल रही है.
94 दिनों से जेल में बंद है कालीचरण
44 वर्षीय हिंदू धर्मगुरु कालीचरण महाराज उर्फ अभिजीत धनंजय सराग (Kalicharan Maharaj Abhijeet Dhananjay Saraag) 94 दिनों से जेल में बंद हैं. 30 दिसंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो कस्बे से करीब 25 किलोमीटर दूर बागेश्वर धाम के पास किराए के कमरे से रायपुर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. कालीचरण ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रावणभाटा में आयोजित धर्म संसद में महात्मा गांधी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद उनके खिलाफ153(ए),153
छत्तीसगढ़ पुलिस ने 30 दिसंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो कस्बे के पास से उन्हें गिरफ्तार किया था. करीब 92 दिनों तक जेल में बंद रहने के बाद शुक्रवार को हाई कोर्ट (Chhattisgarh high court) ने शुक्रवार को सशर्त जमानत दे दी थी. कोर्ट ने एक लाख रुपये का निजी बांड व 50-50 हजार रुपये जमा करने वाले दो जमानतदार पेश करने के लिए कहा गया था. सारी कार्रवाई होने के बाद भी रविवार को उनकी रिहाई नहीं हो पाई है. कालीचरण के समर्थकों के चेहरे पर मायूसी देखी गई है.



