नाकाम नक्सलियों की साजिश: सड़क पर प्लांट 5 किलो का IED बरामद, फोर्स को नुकसान पहुंचाना चाहते थे, BDS ने किया डिफ्यूज

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में फोर्स के जवानों ने नक्सलियों की साजिश को नाकाम कर दिया है। जवानों ने 5 किलो का आईईडी टिफिन बम बरामद किया है। एरिया डोमिनेशन एवं डि-माइनिंग पर निकलने वाले जवानों को नुकसान पहुंचाने माओवादियों ने आईईडी (Improvised Explosive Device) प्लांट किया था। बम निरोधक दस्ता ने IED को डिफ्यूज कर दिया है। पुलिस ने पुंगारपाल थाने में नक्सलियों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। एक दिन पहले ही बीजापुर जिले में आईईडी की चपेट में आने से 4 जवान घायल हुए हैं, जिनका रायपुर में उपचार चल रहा है।
दरअसल, बस्तर में भूमकाल दिवस की 112वीं वर्षगांठ को माओवादियों द्वारा जोर-शोर से मानने का लगातार आह्वान किया जा रहा है। माओवादियों ने अपने पर्चे में भूमकाल दिवस के साथ-साथ जनताना सरकार के स्थापना दिवस को भी मनाने का आह्वान किया है। दिनदहाड़े सड़क पर पोस्टर लगाने व पर्चे फेंकने पर बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि मौके के लिए तत्काल सुरक्षाबलों को रवाना कर दिया गया। माओवादियों द्वारा फेंके पर्चों को जब्त कर मार्ग बहाल कर दिया गया है। फिलहाल आसपास के क्षेत्रों में जवानों को सर्चिंग का आदेश दिया गया है, जिससे राहगीरों में किसी प्रकार की दहशत न रहे।
क्या है भूमकाल आंदोलन आप भी जानिए
बस्तर में भूमकाल आंदोलन सन् 1909 में प्रारंभ हुआ था। यह आंदोलन आदिवासियों के स्वाभिमान, आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन तथा आदिवासियों की स्वतंत्रता की लड़ाई थी। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजों से लोहा लिया था। भूमकाल क्रांति के महानायक अमर शहीद गुंडाधुर ने आजादी के 37 साल पहले सन 1910 में बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई छेड़ी, जिनके कब्जे में पूरा देश था। शहीद गुंडाधुर अंग्रेजों के सामने नहीं झुके और उन्होंने आदिवासी समाज को जोड़े रखा था।



