शहर का हर सिरा मुझसे ही मिलता है।रास्ते अलग है पर जमीन वही है।। ( स्व संग्रह से)

बेबाक.. अनकही कहानियां/ नवीन श्रीवास्तव ,पत्रकार,लेखक,जगदलपुर -बस्तर,चर्चा -ए -चौराहा :चांदनी चौक (किश्त-12)

चाँदनी चौक -चौराहे से थोड़ी दूर पंडित दीनदयाल उपाध्याय व्यवसायिक परिसर से ऐसी खबर है कि 2 बोरियों में शराब की खाली बोतलें कुछ दिनों से यहां लावारिस पड़ी है …शायद खाली है इसलिए..वरना खैर..अब यह तो पता नहीं कि इसे गटकने वाले कौन कौन है..और कौन है जो खाली शराब और बीयर की बोतल छोड़ गए… अब तो शायद फॉरेंसिक जांच से पता चल सकता है कि वे कौन और कैसे है..!! जिन्होंने निगम व्यावसायिक परिसर को शराब खाने में बदल दिया आखिर वह कौन है जो बेफिक्र होकर यहां आते हैं और बेहोशी गटक कर समाज में लोगों के बीच जाकर गुम हो जाते हैं .. और छोटे बड़े नेता लोग केवल सुर्खियों में शराबबंदी-शराबबंदी खेलते रहते है.. वैसे इस जगह को लेकर जिम्मेदार लोगों और जनप्रतिनिधियों के ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेने कई-कई वजह हैं बहरहाल भला हो जिसने कम से कम इकट्ठा कर बोरियों में डाल तो रखा है ..हो सकता है उसके सामने यह सवाल रहा हो कि इसका किया क्या जाए…आखिर कब -तक चुपके से चोरी छिपे किसी बुराइयों को खत्म करने के बजाय उससे छिपाते -छिपते भागते रहेंगें…संभव है इस खबर के बाद यह दो शराब बीयर की खाली बोतलों से भरी यह बोरियां हटा ली जाए पर उससे भी बड़ी बात यह हैं कि इस व्यवसायिक परिसर पर अंदर इस तरह लावारिस रखी पड़ी नशेमन बोतलों की यह समस्या बाहर से भी जुड़ी है और इस समस्या से रूबरू होना शहर के भद्र स्वच्छता अभियान ..और पर्यावरण से जुड़े लोगों के साथ शहर हित की बात करने वालो को जानना बेहद जरूरी है( जारी…फिर मिलता हूं)

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