सिर्फ कोल इंडिया के नफा-नुकसान की होगी बात

बिश्रामपुर । कोयला मजदूरों के 11 वें वेतन समझौते के निर्धारण के लिए कोल इंडिया मुख्यालय में जुलाई माह में आयोजित पांचवीं बैठक को लेकर सभी श्रमिक संगठन इस बार दो टूक बात करने के मूड में हैं। श्रमिक नेताओं में प्रबंधन के टालमटोल रवैये को लेकर नाराजगी है। बीएमएस के बड़े नेता सुरेंद्र पांडेय ने तो स्पष्ट कह दिया कि ईसीएल या किसी अन्य अनुषांगी कंपनी के नफा-नुकसान के आधार पर बात नहीं करेंगे। सिर्फ कोल इंडिया के नफा नुकसान की बात होगी। यदि कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से टाल मटोल किया गया तो इस बार यूनियनें कुछ निर्णय लेंगी। बीएमएस के राष्ट्रीय पदाधिकारी सुरेंद्र पांडेय ने कहा कि जब आठवें वेतन समझौते में 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि हुई थी, तब भी कुछ अनुषांगी कंपनियां घाटे में रही होंगी। ऐसे में कोल इंडिया की ओर से ईसीएल, बीसीसीएल या डब्ल्यूसीएल आदि की आर्थिक स्थिति का रोना रोया गया तो हम विरोध करेंगे। पहले भी कोल इंडिया के नफा-नुकसान पर वेतन समझौता होता आया है। इस बार भी इसी आधार पर होगा। कुछ कंपनियां घाटे में रहती हैं तो कुछ काफी मुनाफे में रहती हैं। अनुषांगी कंपनी की बैलेंसशीट कभी वेतन समझौता का आधार नहीं रही है। जब 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि हुई थी तो कुल मैनपावर चार लाख से अधिक था। अब ढाई लाख मैनपावर है, तो तीन प्रतिशत की बात कैसे की जा रही है। इधर एटक के राष्ट्रीय नेता लखन लाल महतो ने पिछली बैठक में तीन प्रतिशत वेतन वृद्धि के प्रबंधन की ओर से दिए गए प्रस्ताव को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि वेतन समझौता आठ में 25 प्रतिशत, वेतन समझौता नौ में 24 प्रतिशत तथा वेतन समझौता 10 में 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि हुई। वेतन समझौता 11 में तीन प्रतिशत का प्रस्ताव किस आधार पर दिया गया, यह समझ से परे है। प्रबंधन को पांचवीं बैठक में पूरा होमवर्क करके आना होगा।
गैर कोयला क्षेत्र से कई अधिकारी कोल इंडिया एवं उसकी कंपनियों में बोर्ड स्तरीय अधिकारी बन रहे हैं। पहले कोल सेक्टर के ही अधिकारी कोल इंडिया एवं सहायक कंपनियों में सीएमडी व निदेशक नियुक्त किए जाते थे। सीसीएल में निदेशक वित्त के रूप में डीएनएच पावर डिस्ट्रिब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड के पवन कुमार मिश्रा रहे। इसके पहले एनटीपीसी के एजीएम अजय कुमार का चयन सीएमपीडीआईएल डीटी के रूप में हुआ है। वहीं कोल इंडिया के डायरेक्टर बिजनेस डेवलपमेंट के रूप में चयनित देवाशीष नंदा भी गैर कोयला कंपनी से हैं। इतना ही नहीं कोल इंडिया के निदेशक कार्मिक विनय रंजन भी गैर कोयला कंपनी से आए हैं और ईसीएल में निदेशक कार्मिक बने थे। वे इसके बाद कोल इंडिया के निदेशक कार्मिक भी चुने गए। पिछले एक साल में कोल इंडिया के बोर्ड स्तरीय अधिकारियों के लिए आयोजित हो रहे साक्षात्कार में गैर कोयला क्षेत्र के काफी अधिकारी दिलचस्पी ले रहे हैं। एनटीपीसी सहित विभन्निा् बिजली कंपनियों, सेल तथा बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों के अधिकारी भी कोल कंपनियों में निदेशक व सीएमडी बनने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।



