संकल्प ही विकल्प-2)संक्रमण के चलते जिंदगी भर की लड़ाई में कहीं कोई बच्चा अकेला ना रह जाए ..

कोरोना के खिलाफ मिलजुल कर लगातार चल रही लड़ाई …समय के पन्ने पर जल्दी ही अनोखी जीत दर्ज होने वाली है
जगदलपुर /नवीन श्रीवास्तव

वैश्विक संक्रमण के इस दौर में दुनिया के साथ हमारा देश भी कोरोना महामारी के खिलाफ जीत के संकल्प के साथ लगातार अपनी लड़ाइयां लड़ रहा है और पूरे हौसले के साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश भी।संकल्प ही जब विकल्प बन जाता है तो जीत भी पक्की है मानिये । इस कठिन समय में कोरोना संक्रमण से जहां ठीक होने वालों की संख्या अनगिनत है वहीँअनेकानेक परिवार प्रभावित भी हुए है इस तरह की दुखद खबरें भी आ रही है कि कहीं किसी परिवार में संक्रमण के चलते कोई अकेला रह गया, कहीं बच्चे अकेले पड़ गए है संभव है ऐसे में किसी बुजुर्ग को सहारे की जरूरत हो या फिर कोई बच्चियां या औरत हो तो सबसे पहले उनकी सुध लेने के लिए उनके अपनों ,रिश्तेदारों की वर्तमान में भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है अगर कोई बच्चा अकेला रह जाता है तो उसके सामने कोरोना के बाद भी भविष्य का सवाल खड़ा रहेगा ऐसे में जरूरी है मानवीय भावनाओं से सृजित इस समाज और इसे चलाने वाले इस व्यवस्था तंत्र में विपदा से जूझ रहे ऐसे में कोई बच्चें, बच्चियां या कोई बुजुर्ग आदि हो जिनके सामने इस कोरोना के समय और आगे भी भविष्य का संकट खड़ा हो तो उनका सुध लिया जाये और योजना बनाकर उन्हें फिर से जिंदगी के स्वभाविक धारा में जोड़ा जाए । समाज व जनता से सीधे जुड़े जनप्रतिनिधि इस विषय को उठा सकते हैं वही ऐसे जरूरत मन्दों को चिन्हित किया जाए और उदारता पूर्वक परिस्थितियों के अनुसार अगर इनके सामने भविष्य को लेकर संकट खड़ा हो गया है तो यथासंभव व्यवस्था सुनिश्चित की जाए । जो इस विपदा में अकेले पड़ गए हो उनके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जा सकता है या स्थानीय सूत्रों से इसे जाना पहचाना जा सकता है पर इनके आत्मसम्मान का ख्याल भी रखा जाए । वर्तमान कोरोना समय व बाद में भी जिंदगी कहीं ठहर कर थम या ठहर कर टूट ना जाए खास कर कहीं कोई बच्चे अकेले ना हो जाये यह ध्यान रखना या फिक्र तो समाज और व्यवस्था की ही हैं।



