राहुल गांधी से नवजोत सिंह सिद्धू की सवा घंटे की गुफ्तगू, निकलेगा पंजाब की कलह का हल?

पंजाब के विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरकार आज राहुल गांधी से मुलाकात कर ली है। दोनों नेताओं के बीच लगभग सवा घंटे तक बातचीत हुई। इससे पहले खबर थी कि राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात से ही इनकार कर दिया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बुधवार को सुबह ही नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रियंका गांधी से भी मुलाकात की थी। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मीटिंगों का यह दौर अहम है। राज्य के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय से अनबन चल रही है, जिसे कांग्रेस लीडरशिप इलेक्शन से पहले खत्म कराना चाहती है। प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। सिद्धू से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी और फिर सोनिया गांधी से मिलने पहुंची थीं। इसके बाद प्रियंका ने सिद्धू से घर पर एक बार फिर मुलाकात की थी। दरअसल कैप्टन से तकरार के बीच पिछले दिनों सिद्धू ने उन पर बादल परिवार के साथ मिलीभगत का आरोप लगा दिया था। यही नहीं उन्होंने कहा था कि मैं दो परिवारों के सिस्टम के खिलाफ हूं और उन्हें हटाने के पक्ष में हूं। सूत्रों के मुताबिक उनके इस बयान को कांग्रेस लीडरशिप ने गलत माना था। हाईकमान का मानना है कि उन्हें इस तरह खुलेआम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला नहीं बोलना था।

सोमवार से ही दिल्ली में कैंप कर रहे हैं नवजोत सिद्धू – नवजोत सिंह सिद्धू सोमवार से ही दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। उनके इस दौरे को पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह को सुलझाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बता दें कि बीते सप्ताह कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पंजाब के 20 नेताओं से मुलाकात की थी और गुटबाजी को खत्म कराने का प्रयास किया था। खुद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पंजाब की कलह को थामने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे की लीडरशिप में तीन नेताओं का एक पैनल बनाया था। इस पैनल ने सिद्धू को राज्य के डिप्टी सीएम बनने का ऑफर दिया था। हालांकि कहा जा रहा था कि खुद सिद्धू ने इससे इनकार किया था और कहा था कि वह प्रदेश के अध्यक्ष बनना चाहते हैं।

सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ हैं कैप्टन – वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ हैं। उनकी राय है कि कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष किसी हिंदू नेता को बनाया जाना चाहिए। बता दें कि 2019 में नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। यह झगड़ा इसी साल 21 मई को तब बढ़ गया, जब नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती दी कि वह साबित कर दें कि आखिर कब उन्होंने किसी दूसरी पार्टी के नेता से मुलाकात की थी। 

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